भिलाई इस्पात संयंत्र से 250 टन लौह स्क्रैप चोरी का मुख्य आरोपी यूपी से गिरफ्तार, कई बड़े नामों के खुलासे की संभावना

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में बहुचर्चित भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) स्क्रैप चोरी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले में मुख्य आरोपी संजय सिंह को दुर्ग-भिलाई पुलिस ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से गिरफ्तार किया है। करोड़ों रुपये के इस मामले में आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस पूरे मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था। इसके बाद मुख्य आरोपी संजय सिंह और उसके सहयोगी अभय सिंह की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। फिलहाल अभय सिंह अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
फ्लू डस्ट की आड़ में चल रहा था चोरी का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह पूरा अवैध कारोबार काफी सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि भिलाई के हथखोज क्षेत्र स्थित एके ट्रेडर्स के प्लॉट नंबर 18A/05 में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं।
सूचना के आधार पर पुलिस ने जब छापा मारा तो वहां खड़े कई हाइवा और ट्रकों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि वाहनों में ऊपर से फ्लू डस्ट (औद्योगिक राख) भरी गई थी, जबकि उसके नीचे बीएसपी से चोरी किया गया भारी लौह स्क्रैप, लोहे की प्लेटें, बीम और कटिंग सामग्री छिपाकर रखी गई थी।
पुलिस ने मौके से लगभग 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 90 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन, मशीनें और अन्य सामग्री मिलाकर करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी।
वर्षों से चल रहा था संगठित रैकेट
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह कोई एकबारगी चोरी नहीं थी, बल्कि लंबे समय से चल रहा एक संगठित नेटवर्क था। सबसे बड़ी बात यह है कि भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे हाई सिक्योरिटी औद्योगिक क्षेत्र से इतने बड़े पैमाने पर स्क्रैप की चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पुलिस का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि संयंत्र से जुड़े कुछ कर्मचारी, अधिकारी और ठेका व्यवस्था से जुड़े लोगों की भी संभावित भूमिका हो सकती है।
आपसी विवाद से खुला पूरा मामला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस बड़े रैकेट का खुलासा किसी नियमित जांच से नहीं, बल्कि गिरोह के सदस्यों के बीच हिस्सेदारी और पैसों के विवाद के कारण हुआ।
बताया जा रहा है कि गिरोह के अंदर बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद जानकारी बाहर आई, जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।
एक और आरोपी गिरफ्तार, 7 दिन की रिमांड
पुलिस ने मुख्य आरोपी संजय सिंह के साथ इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम लोगों और कथित सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं।
अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले पुलिस आठ आरोपियों को जेल भेज चुकी थी। फरार आरोपी अभय सिंह सहित कुछ अन्य संदिग्ध अभी भी पुलिस के रडार पर हैं।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि बीएसपी जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम से वर्षों तक चोरी कैसे होती रही और इसके पीछे किन लोगों का संरक्षण प्राप्त था।
यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े संगठित औद्योगिक भ्रष्टाचार और अवैध नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



