महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल: शिंदे गुट का दावा, उद्धव ठाकरे के 6 सांसद शिवसेना में शामिल

नई दिल्ली (एजेंसी)। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना में वर्ष 2022 जैसी बड़ी टूट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद अब शिंदे गुट के साथ आ गए हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) चंद्रकांत रघुवंशी ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में यह बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक बार फिर “ऑपरेशन टाइगर” सफल हुआ है और उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है।
शिंदे गुट का बड़ा दावा
चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा,
“महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर हुआ है। आज छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे पर विश्वास जताया और शिवसेना में शामिल हो गए हैं। यह अच्छी बात है। हम उनका स्वागत करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई नेता जनता के लिए प्रभावी ढंग से काम करना चाहता है, तो उसे शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन के साथ जुड़ना चाहिए। उनके इस बयान को महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
उद्धव गुट में फिर टूट की अटकलें
राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद लंबे समय से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं और उनमें से कई सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी जून 2022 में बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिला था, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के कई विधायकों के साथ बगावत कर पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया था। उसी घटनाक्रम के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और शिंदे मुख्यमंत्री बने।
अब फिर से सांसदों के स्तर पर संभावित टूट की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
मामला लोकसभा स्पीकर तक पहुंचा
इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि शिवसेना (यूबीटी) सांसदों से जुड़ा यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास पहुंच चुका है और आगे का निर्णय वही करेंगे।
उन्होंने कहा कि सांसदों द्वारा दिया गया पत्र शिवसेना (यूबीटी) का आंतरिक मामला है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत स्पीकर इस पर फैसला लेंगे।
संजय राउत पर साधा निशाना
प्रतापराव जाधव ने इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की भाषा और बयानबाजी लगातार की जा रही है, उससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को नुकसान हो रहा है।
उनका कहना था कि आक्रामक राजनीतिक बयान और लगातार टकराव की रणनीति पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ा रही है।
स्थापना दिवस से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
शिवसेना का स्थापना दिवस 19 जून को मनाया जाना है। इससे ठीक पहले आए इन राजनीतिक दावों ने महाराष्ट्र की राजनीति को और गर्म कर दिया है।
प्रतापराव जाधव ने स्थापना दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा में विश्वास रखने वाले वास्तविक शिवसैनिक ही इस ऐतिहासिक अवसर पर एकजुट होंगे। इसे राजनीतिक विश्लेषक एकनाथ शिंदे गुट द्वारा खुद को “असली शिवसेना” साबित करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
अभी आधिकारिक पुष्टि बाकी
हालांकि अब तक उद्धव ठाकरे गुट की ओर से इन दावों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही जिन सांसदों के पार्टी बदलने की बात कही जा रही है, उनकी ओर से भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
फिलहाल इतना तय है कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव संभव दिखाई दे रहा है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके व्यापक राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।


