राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुईं पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एम्स पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

रायपुर 05, जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोक कलाकार, साहित्यकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक अपनी प्रिय लोकगायिका को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां लोगों ने पुष्प अर्पित कर नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। वातावरण में गहरा सन्नाटा और भावुकता का माहौल था। कई लोगों की आंखें उस कलाकार को विदा करते समय नम हो गईं, जिसने अपनी आवाज़ से महाभारत की कथाओं को गांव-गांव से लेकर विश्व मंच तक पहुंचाया।
इससे पहले मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रायपुर एम्स पहुंचे और डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान थीं। उनका जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
अंतिम विदाई के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कलाकार और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
करीब पांच दशकों तक पंडवानी की साधना करने वाली डॉ. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और कापालिक शैली से लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनके जाने से भारतीय लोककला का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया, लेकिन उनकी कला, उनकी आवाज़ और उनकी विरासत सदैव अमर रहेगी।



