छत्तीसगढ़ में भालू का आतंक: कांकेर में 3 की मौत, बचाव दल पर भी किया हमला

रायपुर.। छत्तीसगढ़ के जंगलों से लगे इलाकों में स्लॉथ भालुओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला कांकेर जिले के नरहरपुर वन परिक्षेत्र के मरकाटोला-लारगांव क्षेत्र का है, जहां एक आक्रामक मादा भालू के हमले में हलालखोर जुर्री (45), चमरीन जुर्री (40) और सोरिन जुर्री (30) की दर्दनाक मौत हो गई। तीनों खेत में कृषि कार्य कर रहे थे, तभी भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बचाव के लिए पहुंचे वन विभाग के डिप्टी रेंजर सहित कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग ने लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार, घटना के बाद ग्रामीण जब घायलों को बचाने पहुंचे तो मादा भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। बचाव अभियान में शामिल वन विभाग की टीम को भी भालू के हमले का सामना करना पड़ा। इसके बाद वन विभाग ने विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर भेजी और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर निगरानी शुरू कर दी।
इधर धमतरी जिले में भी भालू के हमले की एक और घटना सामने आई है। जंगल में कुकुरमुत्ता (मशरूम) तलाशने गए दो ग्रामीण अचानक भालू के सामने आ गए। भालू ने दोनों पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का अस्पताल में उपचार जारी है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं भालुओं के हमले?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—
- जंगलों के आसपास तेजी से बढ़ती मानव बस्तियां।
- भोजन और पानी की तलाश में भालुओं का गांवों तक पहुंचना।
- जंगलों में मानवीय गतिविधियों और आवाजाही में वृद्धि।
- शावकों को खतरा महसूस होने पर मादा भालू का अत्यधिक आक्रामक हो जाना।
- प्राकृतिक आवास और खाद्य स्रोतों में कमी।
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्लॉथ भालू सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन अचानक आमना-सामना होने या खतरा महसूस होने पर वे बेहद हिंसक हो सकते हैं।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
कांकेर की घटना के बाद वन विभाग ने विशेष रेस्क्यू टीम तैनात कर प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। आक्रामक मादा भालू को ट्रैंक्यूलाइज (बेहोश) कर सुरक्षित नियंत्रित करने तथा आबादी से दूर करने के प्रयास किए गए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से जंगल और जंगल से लगे क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है।
ग्रामीणों के लिए सुरक्षा सलाह
- सुबह और शाम के समय अकेले जंगल या जंगल से लगे क्षेत्रों में न जाएं।
- मशरूम, लकड़ी या अन्य वन उपज एकत्र करने के लिए समूह में जाएं।
- भालू दिखाई देने पर उसके पास जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें।
- किसी भी वन्यजीव की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
- बच्चों और बुजुर्गों को जंगल किनारे अकेले न भेजें।
छत्तीसगढ़ में बढ़ रही चुनौती
कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, कबीरधाम और सरगुजा सहित प्रदेश के कई वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से भालू-मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन और जल स्रोतों का संरक्षण तथा संवेदनशील क्षेत्रों में जनजागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।



