पंडवानी महासम्मेलन: तीजन बाई के नाम पर मिलेगा लोककला अलंकरण, 70 कलाकार दलों को 25-25 हजार की प्रोत्साहन राशि

रायपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके नाम पर लोककला अलंकरण शुरू करने और उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में शामिल 70 कलाकार दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की। इसके अलावा बानबरद मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने और अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड बनाने की घोषणा की गई।
तीजन बाई के नाम पर शुरू होगा लोककला अलंकरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं प्रदेश के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण-संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन और व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि अपनी अद्वितीय कला-साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी ऐसी अनूठी लोकविधा है, जिसमें कलाकार गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत की कथाओं और पात्रों को जीवंत कर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीजन बाई की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल की जाएगी। उनके नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
70 कलाकार दलों को मिलेगी 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
पंडवानी महासम्मेलन में आयोजकों की मांग पर मुख्यमंत्री ने 70 कलाकार दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इन दलों में पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं। इस पहल से प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करना बड़ी उपलब्धि है। इस मंच ने कलाकारों को अवसर उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
छत्तीसगढ़ में विकसित होगी फिल्म सिटी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए भी काम कर रही है। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ी सिनेमा और अन्य फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, प्रदेश के कलाकारों और युवाओं के लिए रोजगार तथा रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खुलेंगे।
बानबरद में स्कूल उन्नयन और सड़क निर्माण की घोषणा
पंडवानी महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़ी मांगों पर भी घोषणा की। उन्होंने बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने और अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण कराने की घोषणा की।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं। इन कलाओं ने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया है। उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी इसी उत्साह के साथ जारी रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन में कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकार और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



