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कुपोषण से सुपोषण की ओर बढ़ते कदम, अम्बिकापुर NRC में बच्चों को मिल रही नई जिंदगी

रायपुर। बचपन खेलना, दौड़ना, हंसना और सीखना है, लेकिन कुपोषण की स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य और सामान्य विकास को प्रभावित कर सकती है। ऐसे बच्चों को समय पर उपचार, पौष्टिक आहार और उचित देखभाल उपलब्ध कराने में पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सेवा संकल्प अभियान के बीच सरगुजा जिले के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की तस्वीर सामने आ रही है। यहां कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखभाल और पोषण पुनर्वास के साथ उनके माता-पिता को भी बच्चों के खान-पान और देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाती है।

20 बिस्तरों वाले केंद्र में सैकड़ों बच्चों का उपचार

अम्बिकापुर के 20 बिस्तरों वाले पोषण पुनर्वास केंद्र में वर्ष 2021-22 के दौरान 189 बच्चों का उपचार किया गया। इस दौरान दर्ज दर 73 प्रतिशत रही। वहीं अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 248 बच्चों का उपचार किया गया और यह दर बढ़कर 88 प्रतिशत दर्ज हुई।

केंद्र में बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की नियमित निगरानी की जाती है। आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के साथ उन्हें पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराया जाता है। उपचार के दौरान अभिभावकों को भी बच्चों के पोषण और देखभाल के व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाती है, ताकि बच्चे के घर लौटने के बाद भी सुपोषण की प्रक्रिया जारी रह सके।

बच्चों के बढ़ते वजन में दिखी उम्मीद

केंद्र में उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में वजन और वृद्धि में सुधार के उदाहरण भी सामने आए हैं। शिवाशी का वजन 7.6 किलोग्राम से बढ़कर 8.840 किलोग्राम, रश्मि का 9.3 किलोग्राम से 10.720 किलोग्राम, प्रतीक का 8.5 किलोग्राम से 9.370 किलोग्राम और युवराज का वजन 12 किलोग्राम से बढ़कर 13.980 किलोग्राम दर्ज किया गया।

बच्चों के वजन में यह बदलाव उपचार और पोषण पुनर्वास के दौरान उनकी बेहतर होती पोषण स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल है। हालांकि, केवल वजन के आधार पर बच्चे के संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और वृद्धि की निगरानी भी जरूरी है।

उपचार के साथ अभिभावकों को भी प्रशिक्षण

NRC में बच्चों के उपचार के साथ माता-पिता को उम्र के अनुसार संतुलित और विविध आहार, स्वच्छता, बीमारी के दौरान देखभाल तथा बच्चे की नियमित वृद्धि की निगरानी के बारे में जानकारी दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अमले के समन्वय से बच्चों के पोषण की निगरानी और परिवारों को मार्गदर्शन देने का काम किया जाता है। आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से भी बच्चों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर समय पर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

अस्पताल से घर तक जारी रहती है सुपोषण की यात्रा

पोषण पुनर्वास केंद्र में उपचार पूरा होने के बाद भी बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। घर लौटने के बाद बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार देना, स्वच्छता का ध्यान रखना, बीमारी के दौरान उचित देखभाल करना और नियमित रूप से वृद्धि की निगरानी करना जरूरी है।

कुपोषण से मुकाबला केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है। इसकी सफलता घर की थाली, परिवार की जागरूकता, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्यकर्मियों के मार्गदर्शन तथा समय पर उपचार की संयुक्त व्यवस्था पर निर्भर करती है।

अम्बिकापुर का पोषण पुनर्वास केंद्र इसी दिशा में बच्चों और उनके परिवारों को उपचार के साथ पोषण संबंधी जागरूकता उपलब्ध करा रहा है। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और उनके चेहरों पर लौटती मुस्कान इस प्रयास की मानवीय तस्वीर पेश करती है।

कुपोषण किसी बच्चे की पहचान नहीं है। समय पर पहचान, उपचार, पर्याप्त पोषण और निरंतर देखभाल के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है। बच्चों का स्वस्थ होना न केवल उनके वर्तमान जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वस्थ समाज और मजबूत भविष्य की नींव भी है।

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