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विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में 3 साल में 437 लाख टन धान खरीदी, किसानों को मिले ₹1.40 लाख करोड़

राज्योत्सव 2026 विशेष: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों के हित में बड़े फैसले, धान खरीदी से लेकर आधुनिक खेती और सिंचाई तक बदल रहा कृषि परिदृश्य

तीन वर्षों में किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी

रायपुर। छत्तीसगढ़ को देशभर में धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का सबसे मजबूत आधार खेती और किसान हैं। खेतों में मेहनत करने वाले अन्नदाताओं की खुशहाली सीधे प्रदेश की आर्थिक समृद्धि से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे होने पर आयोजित राज्योत्सव 2026 में छत्तीसगढ़ की कृषि विकास यात्रा और किसानों के हित में लिए गए फैसले विशेष चर्चा का विषय हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते तीन वर्षों के दौरान किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, खेती को आधुनिक बनाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।

इन प्रयासों का एक बड़ा उदाहरण पिछले तीन खरीफ सीजन में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान है। यह आंकड़ा बताता है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धान खरीदी की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।

तीन साल में 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी किसानों की आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा आधार है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पिछले तीन खरीफ विपणन वर्षों में बड़े पैमाने पर धान का उपार्जन किया गया।

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन पहुंचा। वहीं वर्ष 2025-26 में लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया।

इस तरह तीन वर्षों में कुल लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया।

धान खरीदी से मिलने वाली राशि किसानों के लिए केवल फसल का मूल्य नहीं है, बल्कि इससे खेती की अगली तैयारी, कृषि उपकरणों की खरीद, खाद-बीज, बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक जरूरतों और ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।

3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी

किसानों के हित में राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए भी धान खरीदी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार इस वर्ष 15 नवंबर से धान खरीदी का महाअभियान शुरू होगा।

इस खरीफ सीजन में 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा।

धान विक्रय की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन कराने से छूट दी गई है। साथ ही उन्हें धान बेचने के लिए समिति में ऋण पुस्तिका लेकर जाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित धान खरीदी व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और वास्तविक किसानों को सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।

इस वर्ष प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके साथ ही कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से किसानों से धान की खरीदी की जाएगी। अधिक खरीदी केंद्र खुलने से किसानों को उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम करने में मदद मिलेगी।

कृषक उन्नति योजना से 35,904 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता

धान खरीदी के साथ किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कृषक उन्नति योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को कुल 35,904.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी है।

इसका उद्देश्य किसानों को केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय दलहन, तिलहन और अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।

वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से किसानों को खेती और घरेलू जरूरतों के लिए अतिरिक्त संबल मिलता है।

आधुनिक खेती की ओर बढ़ते कदम, कृषि यंत्रों और मशीनरी बैंक पर जोर

बदलते समय के साथ खेती में आधुनिक तकनीक और कृषि यंत्रों का उपयोग जरूरी होता जा रहा है। इससे किसानों की मेहनत कम करने, समय बचाने और कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024-25 से अब तक किसानों को 8,567 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं।

इन मशीनरी बैंकों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच खेती की लागत और श्रम संबंधी चुनौतियों को कम करने में उपयोगी हो सकती है।

एग्रीस्टैक के माध्यम से भी कृषि व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रदेश के 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है और 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है।

इस डिजिटल व्यवस्था से किसानों की पहचान, कृषि भूमि से जुड़ी जानकारी और विभिन्न योजनाओं के लाभ वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, 46 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिला लाभ

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। मानसून पर निर्भरता कम करने और पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत प्रदेश में 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। इसके लिए किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।

सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों से पानी की बचत के साथ फसलों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने में मदद मिलती है। इससे कम पानी वाले क्षेत्रों में भी बेहतर कृषि प्रबंधन की संभावनाएं बढ़ती हैं।

दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा, किसानों को मिले 219 करोड़ रुपये

छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन और तिलहन की खेती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत प्रदेश के 29 जिलों में 273 केंद्रों के माध्यम से अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी की गई। इसके एवज में किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

वहीं राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है।

इन प्रयासों से प्रदेश में खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करने और कृषि आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

फसल बीमा से किसानों को सुरक्षा, 292 करोड़ रुपये का दावा भुगतान

खेती में मौसम की अनिश्चितता, प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान का जोखिम हमेशा बना रहता है। ऐसे में किसानों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना महत्वपूर्ण है।

खरीफ एवं रबी 2025-26 में प्रदेश के 16.70 लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया। इनमें से 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया।

फसल बीमा किसानों को प्राकृतिक जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान के प्रभाव को कम करने में सहायता प्रदान करता है। इससे विपरीत परिस्थितियों में खेती को दोबारा शुरू करने के लिए आर्थिक सहारा मिल सकता है।

खाद की पर्याप्त उपलब्धता और कालाबाजारी पर नियंत्रण की पहल

किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना भी कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। खरीफ 2026 के दौरान प्रदेश में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

इसके मुकाबले 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया। इसके साथ ही खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निरीक्षण और कार्रवाई भी की गई।

समय पर खाद और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता से किसानों को बुआई और फसल प्रबंधन के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है किसान की खुशहाली

छत्तीसगढ़ में लगभग 40 लाख कृषक परिवार हैं और इनमें करीब 82 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी से आते हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र में लिए जाने वाले फैसलों का प्रभाव सीधे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

धान खरीदी से किसानों के हाथों में पहुंचने वाली राशि गांवों के बाजारों, व्यापार, परिवहन, कृषि उपकरणों, खाद-बीज और अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति देती है। वहीं फसल विविधीकरण, सिंचाई, आधुनिक कृषि यंत्र, डिजिटल पंजीयन और बीमा जैसी पहल खेती को अधिक व्यवस्थित और जोखिम के प्रति सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

राज्योत्सव 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ की कृषि विकास यात्रा यह संकेत देती है कि प्रदेश की समृद्धि का रास्ता किसानों की आर्थिक मजबूती से होकर गुजरता है।

धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आधुनिक खेती और सिंचाई सुविधाओं के माध्यम से अन्नदाताओं को सशक्त बनाने के प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इस बात से भी तय होगा कि किसानों की लागत कितनी कम होती है, उनकी आय कितनी बढ़ती है और कृषि को कितना लाभकारी बनाया जा सकता है।

अन्नदाता की खुशहाली, खेती की समृद्धि और गांवों की आर्थिक मजबूती ही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे मजबूत नींव है।

लेखक: डॉ. ओम प्रकाश डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

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