3 महीने में तैयार होगी नई रिहाई नीति, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिए निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को राहत देने की दिशा में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर ऐसे कैदियों की समयपूर्व (Premature) या मानवीय आधार पर रिहाई के लिए एक व्यापक नीति तैयार कर अधिसूचित करें।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि जेल में बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अपने गरिमा के साथ जीने के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि वृद्ध और असाध्य रोगों से पीड़ित कैदियों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई नीति में पात्रता के स्पष्ट मानदंड, प्रक्रिया और “गंभीर/असाध्य बीमारी” की एक समान परिभाषा तय की जाए। साथ ही मामलों के त्वरित निपटारे के लिए ई-प्रिज़न्स पोर्टल के माध्यम से समयबद्ध ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित करने को भी कहा है। केंद्र सरकार को राज्यों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसका उद्देश्य वृद्ध और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को मानवीय आधार पर समय पर राहत दिलाना है।



