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छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में होम-स्टे से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, आत्मनिर्भर बनेंगे आदिवासी परिवार

रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। होम-स्टे और पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों, युवाओं और महिला समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। सरगुजा, जशपुर, कबीरधाम और बस्तर जिले के जनजातीय हितग्राहियों को होम-स्टे संचालन और डिजिटल मार्केटिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

राज्य सरकार की नई उद्योग नीति एवं होम-स्टे नीति के तहत जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

चार जिलों के हितग्राहियों को दिया गया प्रशिक्षण

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई), नवा रायपुर द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके प्रथम चरण में सरगुजा, जशपुर, कबीरधाम और बस्तर जिले के हितग्राहियों को शामिल किया गया।

इसी कड़ी में 28 अक्टूबर को टीआरटीआई परिसर में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), रायपुर के तकनीकी सहयोग से एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य बनेगा पर्यटन की पहचान

कार्यक्रम में टीआरटीआई की संचालक हिना अनिमेष नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक सौंदर्य देश-विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। होम-स्टे पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित होंगे। इससे जनजातीय परिवार अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए नियमित आय अर्जित कर सकेंगे।

होम-स्टे पंजीयन और सरकारी सहायता की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के पहले तकनीकी सत्र में छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग की विशेषज्ञ डॉ. शुभदा चतुर्वेदी ने होम-स्टे नीति के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया, निर्धारित मानकों, आवश्यक दस्तावेजों और उपलब्ध अनुदान सहायता के संबंध में हितग्राहियों को मार्गदर्शन दिया।

दूसरे सत्र में आईआईएम रायपुर की विशेषज्ञ तौशीफ आयशा अंसारी ने होम-स्टे को सफल व्यवसाय के रूप में विकसित करने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने स्वच्छता, अतिथि सत्कार, कमरों एवं परिसर के रखरखाव और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के महत्व पर जोर दिया। साथ ही सीमित संसाधनों से व्यवसाय शुरू कर उसे नियमित आय का माध्यम बनाने के बारे में जानकारी दी।

डिजिटल मार्केटिंग से बढ़ेगी ऑनलाइन बुकिंग

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में विशेषज्ञ ज्योतिर्मय देवांगन ने डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सोशल मीडिया, ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के बारे में बताया।

विशेषज्ञ ने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से होम-स्टे संचालक बिचौलियों पर निर्भरता कम करते हुए सीधे पर्यटकों से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इससे ऑनलाइन बुकिंग बढ़ाने और व्यवसाय को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

कार्यक्रम के समापन पर चारों जिलों से आए प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को स्वरोजगार की दिशा में उपयोगी बताते हुए अपने क्षेत्रों में होम-स्टे व्यवसाय शुरू करने के प्रति उत्साह व्यक्त किया।

यह पहल जनजातीय परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने, स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। होम-स्टे के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आय के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

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