नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई शुरुआत, 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा डेरा

अमित शाह बोले— नक्सल हिंसा के पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाना और उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प; दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण
रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में विकास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय शुरू करने की तैयारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाने, उनका पुनर्वास करने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने की है। इसी दिशा में बस्तर के 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के जरिए अब सुरक्षा के साथ-साथ जनसेवा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलमुक्त बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों के बीच दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर भी शुरू हुआ है। 15 से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जाएगा।
नक्सल हिंसा के पीड़ितों को सम्मानपूर्ण जीवन देना प्राथमिकता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। आईईडी विस्फोटों के कारण अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने अंग गंवाए और उनके जीवन पर लंबे समय तक असर पड़ा।
उन्होंने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है। हिंसा से प्रभावित लोगों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करना और उनके लिए सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है। केंद्र सरकार इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।
शिविर में जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ
दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर में तीन जिलों के लाभार्थियों को शामिल किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे। सरकार का कहना है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और उनके पुनर्वास का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों ने कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से अपने जीवन में आए बदलावों के अनुभव साझा किए। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चलने लगे हैं। वहीं बीजापुर के चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में दायां पैर गंवाने के बाद अब कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने में मदद मिली है।
सुरक्षा शिविर अब बनेंगे सेवा और विकास के केंद्र
बस्तर में बदलाव की बड़ी पहल के तौर पर 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदला जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के दौरान स्थापित किए गए 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से इन केंद्रों को जनसेवा और विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब वहां सरकारी अधिकारी बैठकर विकास और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। इन सेवा डेरों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण के साथ इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य केंद्रों पर भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई। 455 लोगों को नौकरी मिली, जबकि 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं और 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए तथा 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई। संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं और 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।
ये प्रयास प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं, आजीविका और विकास के अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
‘नियद नेल्लानार’ से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही विकास की रोशनी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं तथा इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं। गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था से लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसी पहलों के जरिए खेल प्रतिभाओं तथा जनजातीय कला-संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी किया जा रहा है। सरकार का जोर है कि लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति के साथ विकास और सामाजिक गतिविधियों को गति मिले।
खेती, पशुपालन और सिंचाई से बढ़ेंगी आजीविका की संभावनाएं
बस्तर के आर्थिक विकास के लिए कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है और परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।
इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पुनर्वास से आत्मनिर्भरता तक, विकसित बस्तर की ओर कदम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सुरक्षा बलों का साहस, बस्तर की जनता का सहयोग और केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं। अब प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और जरूरी सहायता से वंचित न रहे।
दंतेवाड़ा का दिव्यांगजन सहायता शिविर और सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने की पहल इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा है। बस्तर के सामने अब चुनौती शांति को स्थायी विकास, बेहतर सुविधाओं और स्थानीय लोगों की आर्थिक आत्मनिर्भरता में बदलने की है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर का हर गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को नए अवसर मिलें और प्रभावित परिवार सम्मान के साथ जीवन जी सकें।



