
रायपुर, 17 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज नागरिकों की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने पर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें 3 अधीक्षण अभियंता, 5 कार्यपालन अभियंता और 5 अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों से नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा है।
शिकायतों के निराकरण में मिली लापरवाही
लोक निर्माण विभाग द्वारा अगस्त और सितंबर 2026 में सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा की गई। इस दौरान पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर कई शिकायतों को ऐसी टिप्पणियां दर्ज कर बंद कर दिया गया, जिनसे शिकायत के वास्तविक समाधान की जानकारी नहीं मिलती थी। इसके बाद विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया।
इन 5 अधिकारियों को एल-1 स्तर पर नोटिस
शिकायतों के असंतोषजनक निराकरण के मामले में एल-1 स्तर पर पांच अनुविभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की सोनल ढालेन्द्र शामिल हैं।
एल-2 स्तर पर 5 कार्यपालन अभियंता कार्रवाई के दायरे में
एल-2 स्तर पर शिकायतों का उचित निराकरण नहीं किए जाने पर विभाग ने पांच कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें बेमेतरा संभाग के केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की प्रज्ञा नंद शामिल हैं।
एल-3 स्तर पर 3 अधीक्षण अभियंताओं को नोटिस
इसी तरह एल-3 स्तर पर शिकायतों को बिना सारगर्भित टिप्पणी के बंद करने के मामले में तीन अधीक्षण अभियंताओं से जवाब मांगा गया है। इनमें मंडल क्रमांक-2 रायपुर के डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अर्पणा चौरपगार और राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के महादेव लहरे शामिल हैं।
शिकायत बंद करते समय स्पष्ट जानकारी देना जरूरी
विभाग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि सीएम हेल्पलाइन पर किसी शिकायत को बंद करते समय टिप्पणी में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्रवाई, कार्रवाई की तारीख अथवा समय-सीमा और शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का उल्लेख होना चाहिए। यदि शिकायत किसी दूसरे विभाग से संबंधित है, तो इसका कारण भी स्पष्ट रूप से दर्ज करना जरूरी है।
विभाग के अनुसार, इन जानकारियों के अभाव में शिकायतकर्ता की समस्या के समाधान की पुष्टि नहीं हो पाती और पोर्टल पर शिकायतों के निराकरण से संबंधित आंकड़े भी भ्रामक हो सकते हैं।
15 दिन में देना होगा लिखित जवाब
लोक निर्माण विभाग ने इस मामले को कर्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किए जाने से जुड़ा मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। सभी अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर विभाग के सचिव के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
निर्धारित समय-सीमा में जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के वास्तविक निराकरण और नागरिकों की समस्याओं के समाधान को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों को बंद करने की प्रक्रिया में उचित टिप्पणी और कार्रवाई का विवरण देना आवश्यक है।



