अबूझमााड़ के कस्तूरमेटा में पहुंचा नल से जल, सोलर प्रणाली से 25 परिवारों को मिल रहा स्वच्छ पेयजल

जल जीवन मिशन से खत्म हुई नदी-नालों पर निर्भरता, महिलाओं को मिली राहत और स्वास्थ्य में दिखा सुधार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमााड़ क्षेत्र में स्थित ग्राम कस्तूरमेटा में जल जीवन मिशन के तहत स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में अब सभी 25 परिवारों के घरों तक नल के माध्यम से नियमित पेयजल पहुंच रहा है। इससे ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पानी की समस्या का समाधान हुआ है।
पहले गांव के लोग पीने के पानी के लिए नदी, नालों और पहाड़ी झरनों पर निर्भर थे। विशेष रूप से महिलाओं को प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था। इस कार्य में उनका काफी समय और श्रम लगता था, जिससे घरेलू कार्यों, खेती और बच्चों की देखभाल पर भी असर पड़ता था। प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग करने के कारण दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बना रहता था।
ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की गई। बिजली की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यहां 10 हजार लीटर क्षमता की सोलर आधारित पानी की टंकी स्थापित की गई। इसके साथ ही दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर लगभग 2700 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। इस व्यवस्था के माध्यम से गांव के सभी 25 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि अब घर पर ही पानी मिलने से उनकी दिनचर्या पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है। पानी लाने में लगने वाला समय बचने से वे खेती-किसानी और अन्य घरेलू कार्यों पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। उनका यह भी कहना है कि स्वच्छ पानी मिलने के बाद परिवार के सदस्यों में बीमारियां पहले की अपेक्षा कम हुई हैं।
जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन के बाद गांव में “हर घर जल उत्सव” का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल संसाधनों के संरक्षण और उनके जिम्मेदार उपयोग का सामूहिक संकल्प भी लिया।
कस्तूरमेटा जैसे दुर्गम गांव में पेयजल की नियमित व्यवस्था स्थापित होना इस बात का संकेत है कि जल जीवन मिशन का लाभ अब राज्य के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से न केवल ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि महिलाओं की दैनिक कठिनाइयों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



