पुरी में भक्ति की गूंज: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू, लाखों श्रद्धालु बने साक्षी

पुरी (ओडिशा)। विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा का गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना हुए। लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान के रथों की रस्सियां खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

‘छेरा पहाड़ा’ की परंपरा निभाई गई
रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराज ने पारंपरिक ‘छेरा पहाड़ा’ अनुष्ठान संपन्न किया। इस दौरान उन्होंने स्वर्ण झाड़ू से रथों के चारों ओर प्रतीकात्मक सफाई की। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं।
हर साल नई लकड़ी से बनाए जाते हैं रथ
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथ हर वर्ष नई लकड़ी से तैयार किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय नियमों के अनुसार पुराने रथों का पुनः उपयोग नहीं किया जाता। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और रथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है।
गुंडिचा मंदिर तक पहुंचे भगवान
रथ यात्रा के दौरान तीनों देवता श्रीमंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं, जहां वे कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से भगवान पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस, रेलवे और अन्य विभागों की ओर से भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। इस दिव्य उत्सव में हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।



