
बालाजी स्पंज और अग्रसेन स्टील को लाभ पहुंचाने का आरोप, मंत्री बोले- FIR दर्ज, जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव का मामला मंगलवार को जमकर गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर निजी उद्योगों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव तैयार किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर विरोध दर्ज कराया।
प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड और अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव तैयार किए गए। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस मामले में अब तक किन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और संबंधित कंपनियों पर क्या कार्रवाई की गई है।
उद्योग मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री के जवाब पर भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड सरपंच और सचिव की जानकारी में रहते हैं। ऐसे में केवल अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को कथित रूप से इस पूरे मामले का लाभ मिला, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या संबंधित उद्योगों को दिए गए आवंटन को निरस्त करने पर विचार किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शिकायत सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब एक वर्ष का समय लगा। उनका कहना था कि कांग्रेस के आंदोलन और लगातार बनाए गए दबाव के बाद ही सरकार ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की।
इस पर उद्योग मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में सरपंच, सचिव, कंपनी प्रतिनिधि या कोई अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में विरोध जताया और वॉकआउट कर दिया। इसके बाद कुछ समय तक विधानसभा का माहौल गर्म रहा और फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव का मुद्दा दिनभर सदन की कार्यवाही में चर्चा का केंद्र बना रहा। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई, जबकि सरकार ने जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया।



