17 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, शवों की सूचना देकर गिरोह को पहुंचाते थे फायदा

बिलासपुर। बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पुलिसकर्मी घटना के दौरान और उसके बाद SIMS पुलिस चौकी में पदस्थ रहे थे। जांच में सामने आया कि वे कथित तौर पर पूरे आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बनकर गिरोह को महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराते थे।
गिरफ्तार पुलिसकर्मियों की पहचान रामकुमार पाटनवार (40 वर्ष), निवासी बंधवापारा, सरकंडा तथा रामेश्वर भास्कर (53 वर्ष), निवासी सतनाम नगर, अमेरी के रूप में हुई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों पुलिसकर्मी हीरा खांडे गिरोह के लिए काम कर रहे थे। इनका मुख्य काम यह था कि जैसे ही SIMS अस्पताल में कोई शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचता था, वे तत्काल गिरोह के सदस्य महेन्द्र मनहर को इसकी सूचना देते थे।
इसके बाद महेन्द्र मनहर अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों से संपर्क करता था और उन्हें सरकारी मुआवजे का लालच देकर यह बयान देने के लिए तैयार करता था कि मौत सर्पदंश से हुई है, जबकि वास्तविक मृत्यु किसी अन्य कारण से हुई होती थी।
मुआवजे के लालच में शामिल होते थे परिजन
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह मृतकों के परिजनों को यह भरोसा दिलाता था कि उन्हें शासन के आपदा राहत कोष से मिलने वाली आर्थिक सहायता का हिस्सा मिलेगा। इस लालच में कई परिजन भी कथित तौर पर फर्जी सर्पदंश का दावा करने के लिए तैयार हो जाते थे, जिससे शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
सूचना देने और सहयोग के बदले मिलता था फायदा
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार दोनों पुलिसकर्मी शवों की सूचना देने, मृतकों के परिजनों को गिरोह के संपर्क में लाने और उन्हें तैयार कराने में सहयोग करते थे। इसी भूमिका के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
इससे पहले इस मामले में डॉक्टरों, राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि 17 करोड़ रुपये से अधिक के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।



