कौन हैं नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? RSS से 5 बार सांसद बनने तक का सफर, जानिए पूरा प्रोफाइल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की कमान भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद वेंकटेश जोशी को सौंप दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है। ऐसे समय में जब देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली चर्चा के केंद्र में है, सरकार ने अनुभवी और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता पर भरोसा जताया है।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर (तत्कालीन बीजापुर) में हुआ था। उन्होंने हुब्बली से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और कला (B.A.) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। युवावस्था से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा, जिसने उनके राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन को दिशा दी।
लगातार 5 बार बने सांसद
प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी लगातार जीत दर्ज करते हुए वे पांच बार सांसद बने। उनकी लगातार चुनावी सफलता उन्हें कर्नाटक भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करती है।
भाजपा संगठन में निभाई अहम भूमिका
प्रह्लाद जोशी ने भाजपा संगठन में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वे कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और राज्य में पार्टी के विस्तार में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की उनकी क्षमता की अक्सर सराहना होती रही है।
केंद्र सरकार में संभाले कई बड़े मंत्रालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में प्रह्लाद जोशी पहले भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके हैं। वे संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
शिक्षा मंत्री के सामने बड़ी चुनौतियां
प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षा सुधार जैसे कई बड़े मुद्दे सामने हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।



