Korba Elephant Management Model: तकनीक और जनभागीदारी से मानव-हाथी संघर्ष में आई कमी, देश के लिए बना मिसाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला आज मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) के प्रबंधन में देश के लिए एक नई मिसाल बनकर उभरा है। आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी और संवेदनशील प्रशासन के समन्वय से जिले में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत के नेतृत्व में विकसित यह मॉडल अब देश के अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।
लेमरू हाथी रिजर्व में वैज्ञानिक प्रबंधन
कोरबा जिले का लेमरू हाथी रिजर्व करीब 1.99 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें कटघोरा, कोरबा, धरमजयगढ़ और सरगुजा वनमंडल के 11 वन परिक्षेत्र शामिल हैं।
वन विभाग हाथियों के प्राकृतिक आवास और पारंपरिक कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), GIS मैपिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक विश्लेषण का उपयोग कर रहा है। इससे हाथियों के प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित बने हुए हैं और उनका आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कम हुआ है।

गजसंकेत ऐप और थर्मल ड्रोन बने सुरक्षा कवच
कोरबा मॉडल की सबसे बड़ी ताकत आधुनिक तकनीक है। कटघोरा वनमंडल में 24×7 हाथी नियंत्रण केंद्र, गजसंकेत मोबाइल ऐप, थर्मल ड्रोन, सीसीटीवी निगरानी, टोल-फ्री हेल्पलाइन और प्रशिक्षित हाथी मित्र दल लगातार सक्रिय हैं।
हाथियों की गतिविधियों की रियल टाइम जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है, जिससे लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं और दुर्घटनाओं की आशंका काफी कम हो जाती है।
आंकड़ों में दिखी सफलता
सितंबर 2023 से जून 2026 के बीच गजसंकेत ऐप पर 1,097 हाथी मूवमेंट दर्ज किए गए।
इसी अवधि में 2,68,782 से अधिक रियल टाइम अलर्ट हाथी प्रभावित गांवों तक भेजे गए। इससे सूचना तंत्र पहले की तुलना में अधिक मजबूत और प्रभावी हुआ है।
मानव-हाथी संघर्ष में आई उल्लेखनीय कमी
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2020-21 में मानव-हाथी संघर्ष से 9 लोगों की मौत हुई थी।
वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई।
सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मानव घायल होने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
मकानों और फसलों के नुकसान में भी गिरावट
समय पर अलर्ट और प्रभावी निगरानी का असर संपत्ति और फसलों पर भी दिखाई दिया।
- वर्ष 2020-21 में 513 मकानों को नुकसान पहुंचा था।
- वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 33 रह गई।
फसल और संपत्ति के नुकसान में भी लगातार कमी दर्ज की गई है।

ग्रामीणों की आजीविका को भी मिला सहारा
वन विभाग केवल हाथियों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।
इसके तहत—
- किसान वृक्ष मित्र योजना
- लाख उत्पादन
- दोना-पत्तल निर्माण
- महुआ और कोदो प्रसंस्करण
- अगरबत्ती निर्माण
- सिलाई कार्य
- इको-टूरिज्म
जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे ग्रामीणों की आय बढ़ रही है और वन संरक्षण में उनकी भागीदारी भी मजबूत हो रही है।
मुआवजा व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल
मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित लोगों को जल्द राहत देने के लिए वन विभाग ऑनलाइन मुआवजा प्रबंधन प्रणाली विकसित कर रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद—
- ऑनलाइन आवेदन
- डिजिटल दस्तावेज सत्यापन
- आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग
- समयबद्ध भुगतान
जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे मुआवजा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
देश के लिए बना प्रेरणादायी मॉडल
कोरबा का यह मॉडल साबित करता है कि तकनीक, वैज्ञानिक योजना, जनभागीदारी और संवेदनशील प्रशासन के बेहतर समन्वय से मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत और डीएफओ कुमार निशांत के नेतृत्व में विकसित यह मॉडल न केवल हाथियों के संरक्षण और आमजन की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित कर रहा है, बल्कि देश के अन्य हाथी प्रभावित राज्यों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है।



