
रायपुर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले ने छत्तीसगढ़ के दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। सक्ती जिले के दीपक रात्रे के बाद अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी भूपेंद्र कुमार भैना (28) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों प्रवासी मजदूर कुलगाम के केलाम इलाके स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे, जहां आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया था।
इलाज के दौरान हार गए जिंदगी की जंग
हमले में गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र कुमार भैना को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शनिवार (1 अगस्त) को उनके निधन की खबर गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उनके घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी।
रोजगार की तलाश में गए थे कश्मीर
भूपेंद्र अपनी पत्नी कचरा बाई के साथ करीब तीन महीने पहले रोजगार की तलाश में कश्मीर गए थे। कुछ समय पहले वे गांव लौटे थे, लेकिन परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दोबारा ईंट भट्ठे में मजदूरी करने चले गए। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।
दो साल के बेटे के सिर से उठा पिता का साया
भूपेंद्र अपने दो वर्षीय बेटे मानस को गांव में अपनी छोटी बहन और दादी की देखरेख में छोड़कर कश्मीर गए थे। अब मासूम बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया है। उनके माता-पिता दशरथ भैना और नागेश्वरी भैना भी पंजाब में मजदूरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गांव में मातम, हर आंख नम
छुईहा गांव में घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग लगातार पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच धनीराम बंजारे ने कहा कि पंचायत इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हरसंभव मदद की जाएगी।
राज्य सरकार ने किया सहायता का ऐलान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कुलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले दोनों श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।





