कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक का आरोप, परीक्षा रद्द; 5 सदस्यीय जांच समिति गठित

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGAU) में B.Sc. एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी विषय के प्रश्नपत्र के परीक्षा शुरू होने से पहले वायरल होने का मामला सामने आया है। कथित पेपर लीक की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुरुवार को होने वाली परीक्षा को रद्द कर दिया। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से थाने में FIR दर्ज कराने की भी बात कही गई है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होनी थी। इससे पहले सुबह करीब 8:45 बजे विश्वविद्यालय के डीन कार्यालय को एक ई-मेल मिला, जिसमें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, उस ई-मेल के साथ प्रश्नपत्र संलग्न नहीं था।

इसके बाद करीब 9:30 बजे कुछ व्हाट्सऐप ग्रुप में प्रश्नपत्र की तस्वीरें वायरल होने लगीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को स्थगित कर दिया। अब इस विषय की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।
कुछ प्रश्न मिले, लेकिन पूरा पेपर होने की पुष्टि जांच के बाद
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी संजय नैयर के मुताबिक, वायरल हुए प्रश्नपत्र में कुछ प्रश्न वास्तविक परीक्षा के पेपर से मिलते बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ प्रश्न मेल नहीं खाते। ऐसे में वायरल पेपर वास्तव में परीक्षा का प्रश्नपत्र था या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर परीक्षा रद्द की गई है। परीक्षा देने पहुंचे विद्यार्थियों को बिना परीक्षा दिए वापस लौटना पड़ा।
पांच सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की जांच के लिए अनीश कुमार दवे के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है। समिति यह पता लगाएगी कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा और वायरल हुए प्रश्नपत्र की वास्तविकता क्या है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही है। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है और पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के वायरल होने की घटना गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष मेहनत की है और किसी भी स्थिति में उनके भविष्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तविक था या नहीं और यह परीक्षा से पहले विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचा।



