छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने ली शपथ

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र ने सोमवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। लोकभवन में राज्यपाल रमेन डेका ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल संभाल रहे थे कार्यवाहक CJ की जिम्मेदारी
जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। इससे पहले न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
कौन हैं जस्टिस कृष्ण राम महापात्र?
न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। उनके स्वर्गीय पिता न्यायमूर्ति शरत चंद्र महापात्र भी न्यायपालिका में महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं। पिता से प्रेरित होकर उन्होंने कानून के क्षेत्र में करियर बनाया।
उन्होंने बीए के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की और 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। करीब 26 वर्षों तक उन्होंने वकालत की और सिविल, क्रिमिनल, सर्विस तथा संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में व्यापक अनुभव हासिल किया।
उन्होंने Guardians and Wards Act, Hindu Minority and Guardianship Act और Juvenile Justice Act से जुड़े मामलों में भी पैरवी की। वे राज्य सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील और ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के अधिवक्ता भी रहे। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और NIOS का कानूनी प्रतिनिधित्व किया।
ओडिशा हाईकोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक का सफर
न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र को 17 अप्रैल 2015 को ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। न्यायाधीश के रूप में उन्होंने मध्यस्थता, संवैधानिक अधिकारों और विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी मामलों पर फैसले दिए।
1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। अब शपथ लेने के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उनके करीब चार दशक लंबे कानूनी एवं न्यायिक अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



