सारंगढ़ जिला अस्पताल की डायलिसिस सेवा बनी मरीजों का सहारा, 1500 से ज्यादा लोगों को मिला निःशुल्क उपचार

रायपुर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के किडनी रोगियों के लिए जिला अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) राहत का बड़ा माध्यम बनकर सामने आया है। अस्पताल में इस योजना के तहत अब तक 1500 से अधिक मरीजों का निःशुल्क डायलिसिस किया जा चुका है। इससे उन मरीजों को विशेष लाभ मिला है, जिन्हें पहले नियमित इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था।
राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी प्रयास के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा उपलब्ध हो रही है।
अब जिले में ही मिल रही डायलिसिस की सुविधा
कुछ समय पहले तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अधिकांश किडनी मरीजों को हर सप्ताह डायलिसिस कराने के लिए रायपुर, बिलासपुर या अन्य बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी। बार-बार लंबी दूरी तय करने से मरीजों के साथ उनके परिजनों पर भी अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ता था।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट शुरू होने के बाद यह स्थिति काफी बदली है। अब मरीजों को अपने जिले में ही आवश्यक उपचार मिल रहा है, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों कम हुए हैं तथा नियमित इलाज भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
प्रशिक्षित चिकित्सा टीम दे रही सेवाएं
अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। प्रत्येक मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का नियमित मूल्यांकन किया जाता है और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार डायलिसिस किया जाता है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यूनिट में संक्रमण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन किया जाता है। स्वच्छ और सैनिटाइज्ड वातावरण में तय समय के अनुसार डायलिसिस की प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिससे मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।
गंभीर किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को मिल रहा लाभ
क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित डायलिसिस अत्यंत आवश्यक होता है। अस्पताल में उपलब्ध इस सुविधा से ऐसे मरीजों को शरीर और पैरों में सूजन, पेशाब संबंधी समस्याएं, खून की कमी, उच्च रक्तचाप, सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक थकान, अनिद्रा, सिरदर्द, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली तथा मांसपेशियों में झनझनाहट जैसी समस्याओं के उपचार में मदद मिल रही है।
स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध होने से मरीजों के लिए समय पर डायलिसिस कराना भी आसान हुआ है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित है योजना
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य अंतिम चरण के किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों को जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) आने वाले मरीजों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस सेवाएं प्रदान की जाती हैं। वहीं अन्य पात्र मरीजों को भी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार रियायती दरों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। योजना का संचालन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का सकारात्मक परिणाम
सारंगढ़ जिला अस्पताल में 1500 से अधिक मरीजों को निःशुल्क डायलिसिस सेवा उपलब्ध होना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के सुदृढ़ होने का संकेत माना जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल रही है और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम हुई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस तरह की सेवाओं के विस्तार से दूरदराज के मरीजों को समय पर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।



