धान के साथ सब्जी, फल-फूल और मछली पालन, सरगुजा में आय के विविध स्रोत तैयार

रायपुर। सरगुजा जिले में कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा परीक्षण और कृषि विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हो रहे हैं।
जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी में 60 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन हुआ। धान खरीदी केंद्रों पर ऑनलाइन टोकन, नमी परीक्षण, बारदाना और भुगतान के साथ पेयजल एवं बैठने जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

8,893 किसानों को मिला सौर पंप का लाभ
सरगुजा में सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए सौर सुजला योजना के तहत किसानों को सौर ऊर्जा आधारित पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2016-17 से अब तक जिले के 8,893 किसानों को सौर पंप का लाभ मिल चुका है।
सौर सिंचाई की सुविधा से किसान धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, फलदार पौधे और फूलों की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं। लखनपुर विकासखंड के ग्राम ईरगंवा निवासी किसान लबेद सिंह ने सौर पंप मिलने के बाद खेती में विविधता अपनाई और मछली पालन को भी अपनी आजीविका से जोड़ा।
मृदा परीक्षण से वैज्ञानिक खेती पर जोर
किसानों को खेत की मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का उपयोग करने के लिए मृदा परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल लेने से पहले मिट्टी की जांच कराने और रिपोर्ट के आधार पर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह दे रहे हैं।
इससे आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों के उपयोग, खेती की लागत को नियंत्रित करने तथा फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं।
‘मोर गांव मोर पानी’ से जल संरक्षण को बढ़ावा
सरगुजा में ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को रोकने और खेती के लिए उपलब्ध जल संसाधनों को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
अभियान के तहत तालाबों के गहरीकरण और अन्य जल संरक्षण कार्यों से सिंचाई, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को सहारा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। जिले में 59 तालाबों के गहरीकरण कार्य स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
डबरी से खेती के साथ मछली पालन का अवसर
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कुम्हरता की सूरत कुमारी ने ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से अपने खेत में डबरी का निर्माण कराया। वर्ष 2024-25 में 2.99 लाख रुपये की स्वीकृति से बनी इस डबरी में पानी उपलब्ध होने से सिंचाई के साथ अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।
डबरी के पानी का इस्तेमाल सब्जी, गेहूं और अरहर की खेती के साथ मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे एक ही जल संरचना खेती और अतिरिक्त आजीविका दोनों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।
‘सरगुजा छेरी बैंक’ से महिलाओं को पशुपालन का सहारा
ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने के लिए सरगुजा में ‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल की शुरुआत की गई है। इसके प्रारंभिक चरण में 50 महिलाओं को 76 बकरियों के साथ जोड़ा गया।
इस मॉडल में महिलाओं को नकद ऋण के बजाय बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चार वर्षों में 16 मेमने लौटाने होते हैं। इसका उद्देश्य पशुपालन के माध्यम से महिलाओं को आजीविका का अवसर देना और उपलब्ध संसाधनों को आगे अन्य हितग्राहियों तक पहुंचाना है।
धान से आगे बढ़कर विविध खेती की ओर किसान
सरगुजा में कृषि विकास का दायरा अब केवल एक फसल तक सीमित नहीं है। सिंचाई सुविधा, जल संरक्षण और मृदा परीक्षण के साथ किसान दलहन, तिलहन, सब्जी, फल-फूल जैसी फसलों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके साथ मछली पालन और पशुपालन को जोड़कर ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार किए जा रहे हैं।
कृषि विविधीकरण से उपलब्ध भूमि, पानी और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं। सौर सिंचाई, जल संरक्षण, वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन और कृषि से जुड़ी सहायक गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है।



