World Polio Day 2026: छत्तीसगढ़ में हर साल 1500 से ज्यादा बच्चे क्लब फुट के साथ जन्मे, पोलियो समझने की न करें गलती

रायपुर। विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day 2026) के अवसर पर बच्चों के पैरों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या सामने आई है। छत्तीसगढ़ में हर साल 1500 से अधिक बच्चे जन्मजात क्लब फुट की समस्या के साथ पैदा हो रहे हैं। इस बीमारी में बच्चे के पैर के तलवे अंदर या बाहर की ओर मुड़े हुए रहते हैं। कई बार माता-पिता इसे पोलियो समझ लेते हैं, जबकि क्लब फुट और पोलियो दो अलग-अलग स्थितियां हैं।
भारत को मार्च 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से पोलियो का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, पड़ोसी देशों में पोलियो के मामले मिलने की आशंका को देखते हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का अभियान जारी है।
क्लब फुट क्या है और बच्चों में क्यों होती है यह समस्या?
क्लब फुट एक जन्मजात विकृति है, जिसे चिकित्सा भाषा में कंजेनाइटल क्लब फुट कहा जाता है। इसमें जन्म के समय ही बच्चे के एक या दोनों पैर के तलवे असामान्य रूप से मुड़े हुए रहते हैं। समय पर पहचान और उपचार से इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान और शराब का सेवन क्लब फुट के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा आनुवंशिक और अन्य कारण भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ में 1200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पंजीकृत
प्रदेश में क्लब फुट के उपचार के लिए 1200 से अधिक बच्चों के पंजीकृत होने की जानकारी सामने आई है। रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में इस बीमारी के इलाज की सुविधा उपलब्ध है। यहां बच्चों के पैरों को सही स्थिति में लाने के लिए प्लास्टर लगाया जाता है। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
जानकारी के मुताबिक, आंबेडकर अस्पताल में पिछले चार वर्षों के दौरान क्लब फुट से प्रभावित 700 से अधिक बच्चों का उपचार किया गया है। रायपुर के अलावा राजनांदगांव, धमतरी, कोरबा, अंबिकापुर, रायगढ़ और जगदलपुर के जिला अस्पतालों में भी ऐसे बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
आंबेडकर अस्पताल और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन क्लब फुट के 10 से 12 मामले पहुंचने की जानकारी दी गई है। सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उपचार सुविधाओं से बच्चों और उनके परिवारों को राहत मिल रही है।
पोलियो और क्लब फुट में क्या है अंतर?
पोलियो एक वायरल बीमारी है, जो गंभीर मामलों में बच्चों के शरीर की मांसपेशियों को प्रभावित कर स्थायी लकवा पैदा कर सकती है। इसके विपरीत, क्लब फुट में बच्चे के पैर की बनावट जन्म से ही असामान्य होती है।
यदि नवजात शिशु के पैर के तलवे मुड़े हुए दिखाई दें, तो माता-पिता को इसे पोलियो मानकर घबराने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार शुरू होने से बच्चे के पैरों की स्थिति में सुधार और सामान्य गतिविधियों में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञ की सलाह: समय पर कराएं जांच और उपचार
डॉ. ओंकार खंडवाल, एचओडी, पीडियाट्रिक विभाग, आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में पिछले कई वर्षों से पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद तिरछे तलवों वाले बच्चों को देखकर कई माता-पिता इसे पोलियो समझ लेते हैं। ऐसे बच्चों को जांच और उचित उपचार के लिए हड्डी रोग विभाग में भेजा जाता है।
विश्व पोलियो दिवस का उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के प्रयासों को मजबूत करना है। साथ ही, जन्मजात क्लब फुट जैसी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे के पैरों में किसी भी तरह की असामान्यता दिखने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लें।



