CG News: दिव्यांगता को मात देकर आत्मनिर्भर बने चितुराम नाग, समय पर चुकाया ₹3.60 लाख का ऋण

रायपुर, 31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम की स्वरोजगार योजना दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी चितुराम नाग ने अपने हौसले, मेहनत और वित्तीय अनुशासन से यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उन्होंने निगम से प्राप्त 3.60 लाख रुपये का ऋण समय पर चुकाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
स्वरोजगार योजना से मिली नई पहचान
चितुराम नाग ने वर्ष 2017 में अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम की स्वरोजगार योजना के तहत 3.60 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने रोजगार को मजबूत करने में किया। लगातार मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने व्यवसाय को सफल बनाया और तय समय सीमा के भीतर पूरा ऋण चुका दिया।
दिव्यांगता नहीं बनी सफलता की राह में बाधा
शारीरिक चुनौतियों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद चितुराम नाग ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने आत्मविश्वास और ईमानदारी से यह साबित किया कि यदि सही अवसर और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है। आज उनका ऋण खाता पूरी तरह बंद हो चुका है, जो उनकी आर्थिक जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रमाण है।
दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने चितुराम नाग की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। उनकी सफलता उन सभी युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
दिव्यांग हितग्राहियों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने के लिए छत्तीसगढ़ वित्त एवं विकास निगम ने नई पहल शुरू की है। निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मूक-बधिर और अन्य दिव्यांग हितग्राहियों को विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर प्रतिदिन 300 से 500 रुपये तक की नियमित आय अर्जित कर सकें।
सरकारी योजनाओं से बदल रही जिंदगी
छत्तीसगढ़ सरकार की स्वरोजगार योजनाएं जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी काम कर रही हैं। चितुराम नाग की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर सरकारी सहायता और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है।



