सरकारी स्वास्थ्य योजना का कमाल, डोंगरगढ़ की जीविका अब सुन पाएगी दुनिया की आवाजें

रायपुर, 04 अगस्त 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके/चिरायु) के तहत राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुंडेरा की नन्हीं बच्ची जीविका को नई जिंदगी मिली है। जन्मजात श्रवण बाधिता से जूझ रही जीविका का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया है। अब वह नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास के जरिए धीरे-धीरे सुनने और बोलने की क्षमता विकसित कर सकेगी।
परिवार के लिए लंबे समय से चिंता का कारण बनी जीविका की समस्या की पहचान आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1, डुंडेरा में नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान हुई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की डोंगरगढ़ टीम-ए ने उसकी श्रवण संबंधी समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच कराई और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श के बाद उसे एम्स रायपुर रेफर किया।
एम्स रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जीविका का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया। ऑपरेशन के बाद अब उसे नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास सेवाएं दी जा रही हैं, जिससे वह धीरे-धीरे आवाजों को पहचानना और सामान्य बच्चों की तरह बोलना सीख सकेगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत जन्मजात विकार, पोषण संबंधी समस्याएं, विकास में देरी और अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर बच्चों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
जीविका की सफलता इस बात का उदाहरण है कि समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार से बच्चों का भविष्य बदला जा सकता है। डोंगरगढ़ की आरबीएसके टीम की सतर्कता, समन्वय और त्वरित कार्रवाई ने एक मासूम बच्ची के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है। अब उसके परिवार के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि नई आवाजों और नए सपनों की शुरुआत है।



