कामिका एकादशी आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Kamika Ekadashi 2026: सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के श्रीधर स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है, वहीं इस महीने आने वाली कामिका एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत से व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत पापों का नाश करने वाला माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत के पुण्य को अत्यंत फलदायी बताया गया है। सावन मास में भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष संयोग भी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा के प्रमुख मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 से 4:45 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 6:42 से 8:09 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:37 से दोपहर 12:30 बजे तक
- व्रत पारण: 10 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 5:47 से 8:00 बजे तक
कामिका एकादशी की पूजा विधि
कामिका एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराकर पीले पुष्प, चंदन, रोली, अक्षत और फल अर्पित करें।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा और भोग में तुलसी दल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए इन्हें पहले से तोड़कर रखना उचित माना जाता है।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद विष्णु चालीसा का पाठ और भगवान विष्णु की आरती कर परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
एकादशी व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने की परंपरा है। श्रद्धालुओं को मन, वचन और कर्म से संयम रखने तथा तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा आदि का सेवन नहीं किया जाता। साथ ही बड़ों का सम्मान करने और किसी के प्रति द्वेष भाव नहीं रखने की धार्मिक मान्यता है।
संभव हो तो रात में भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन और मंत्र जाप के साथ जागरण भी किया जाता है। अगले दिन निर्धारित पारण समय में व्रत खोलकर पूजा-अर्चना की जाती है।



