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कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल: सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ प्रभारी, भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी

रायपुर। कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारियों के मद्देनजर कई राज्यों के प्रभारी महासचिवों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने नई नियुक्तियों की सूची जारी करते हुए सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का AICC महासचिव प्रभारी नियुक्त किया गया है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद नए प्रभारियों की नियुक्ति की जानकारी दी। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।

किस नेता को मिली किस राज्य की जिम्मेदारी?

कांग्रेस की नई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • सुखदेव भगत — छत्तीसगढ़
  • भूपेश बघेल — असम
  • सचिन पायलट — पंजाब
  • रणदीप सिंह सुरजेवाला — गुजरात और कर्नाटक
  • डॉ. सिरीवेला प्रसाद — महाराष्ट्र
  • पी.वी. मोहन — आंध्र प्रदेश

रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

तीन महासचिवों को मौजूदा प्रभार से किया गया मुक्त

संगठनात्मक फेरबदल के तहत कांग्रेस ने तीन निवर्तमान महासचिवों को उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। इनमें जितेंद्र सिंह, रमेश चेन्निथला और मणिकम टैगोर शामिल हैं। पार्टी ने इन नेताओं के योगदान की सराहना की है।

वहीं मुकुल वासनिक AICC महासचिव के पद पर बने रहेंगे।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बढ़ेगी सियासी हलचल

सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। नई जिम्मेदारी के साथ प्रदेश संगठन की रणनीति, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकार के खिलाफ आंदोलन को लेकर कांग्रेस नए सिरे से तैयारियां कर सकती है।

नए प्रभारी के सामने प्रदेश संगठन में समन्वय मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को गति देने की चुनौती होगी।

राष्ट्रीय राजनीति में भूपेश बघेल की भूमिका बढ़ी

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का AICC महासचिव प्रभारी बनाए जाने को उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। असम में संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी की रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

कांग्रेस के इस व्यापक संगठनात्मक फेरबदल को आगामी राजनीतिक अभियानों और राज्यों में संगठन को और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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