समय पर उपचार बना जीवनरक्षक, सुकमा जिला अस्पताल में दो माताओं को मिला नया जीवन

सुकमा । जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से किए जा रहे लगातार प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। सुकमा जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तत्परता से जटिल प्रसव के दो मामलों में दो माताओं की जान बचाई गई। दोनों महिलाओं की स्थिति गंभीर थी, लेकिन समय पर उपचार और सफल ऑपरेशन के बाद उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल और जिला कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। इसी का लाभ गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंची दोनों महिलाओं को मिला।
गर्भाशय फटने से बिगड़ी हालत, सफल ऑपरेशन से बची जान
पहला मामला 8 जुलाई 2026 की रात का है। ग्राम कुन्दनपाल (कुकानार) निवासी 42 वर्षीय सुकड़ी को प्रसव पीड़ा के बाद जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान उन्हें गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाया गया। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को पता चला कि उनका गर्भाशय कई स्थानों से फट चुका था। स्थिति बेहद गंभीर थी और तत्काल उपचार जरूरी था।
सिविल सर्जन डॉ. एम.आर. कश्यप के मार्गदर्शन में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल रक्त चढ़ाया और ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा चाटे एवं उनकी टीम ने सफल ऑपरेशन किया। इसके बाद करीब पांच दिनों तक सुकड़ी की लगातार निगरानी और उपचार किया गया। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद 19 जुलाई को उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दूसरी महिला और नवजात दोनों सुरक्षित
दूसरा मामला 15 जुलाई का है। ग्राम कोडरीपाल निवासी 22 वर्षीय विमला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। जांच में उनका गर्भाशय फटा हुआ पाया गया। इससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान खतरे में थी।
चिकित्सकीय टीम ने तत्काल ऑपरेशन किया। डॉक्टरों के प्रयास से मां और नवजात दोनों को सुरक्षित बचा लिया गया। उपचार और निगरानी के बाद विमला को 21 जुलाई को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
समय पर उपचार बना जीवनरक्षक
दोनों जटिल मामलों में चिकित्सकों की तत्परता और अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय पर सही निर्णय, रक्त की उपलब्धता, अनुभवी चिकित्सकीय टीम और लगातार निगरानी के चलते दोनों महिलाओं को नया जीवन मिला।
जिला अस्पताल की यह सफलता जिले में मजबूत होती स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर पेश करती है। प्रशासन की सतत निगरानी और चिकित्सकीय टीम की तत्परता से गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों का जिला अस्पताल पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है।



