छत्तीसगढ़

सुकमा की 10 साल की बच्ची को मिली नई रोशनी, चिरायु योजना से जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन

रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के बीच सुकमा की 10 वर्षीय बच्ची के सफल उपचार की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। कक्षा 4 में पढ़ने वाली इस बच्ची के जन्मजात मोतियाबिंद की पहचान स्कूल में हुए स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हुई। इसके बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत उसका विशेषज्ञ उपचार कराया गया और जगदलपुर के महारानी अस्पताल में सफल ऑपरेशन किया गया।

सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र में रहने वाली बच्ची को काफी समय से साफ देखने में परेशानी हो रही थी। इसका असर उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ-साथ पढ़ाई पर भी पड़ रहा था। परिवार की आर्थिक और अन्य परिस्थितियों के कारण उसका समुचित इलाज नहीं हो पा रहा था।

स्कूल में स्वास्थ्य जांच के दौरान हुई बीमारी की पहचान

चिरायु कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची की आंखों की जांच की। जांच में उसके जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे आगे की जांच और उपचार के लिए जिला अस्पताल सुकमा पहुंचाया।

जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ की जांच के बाद बच्ची को बेहतर उपचार के लिए जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल रेफर किया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में बच्ची का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के बाद नियमित फॉलोअप

ऑपरेशन के बाद बच्ची को करीब एक सप्ताह तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और नियमित फॉलोअप किया गया। स्वास्थ्य टीम ने परिजनों को आंखों की देखभाल, चश्मे के उपयोग, स्वच्छता बनाए रखने और निर्धारित दवाइयां समय पर देने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी।

इलाज के बाद बच्ची की देखने की क्षमता में सुधार हुआ है। बेहतर दृष्टि मिलने से अब उसके लिए पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियां पहले की तुलना में आसान हुई हैं।

समय पर जांच से मिला इलाज

बच्ची का यह उपचार इस बात को रेखांकित करता है कि बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित रेफरल से गंभीर परेशानियों का प्रभावी उपचार संभव है। चिरायु जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ उपचार से जोड़ा जाता है।

दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए समय पर स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सा तक पहुंच उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुकमा की इस बच्ची का सफल उपचार भी इसी प्रयास का एक उदाहरण है।

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