Breaking: 5 पटवारी निलंबित, पटवारी हड़ताल पर प्रशासन का एक्शन

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पटवारियों की हड़ताल को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से हड़ताल पर रहकर शासकीय एवं राजस्व संबंधी कार्यों का निर्वहन नहीं करने वाले जिले के पांच पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों ने यह कार्रवाई की है। निलंबन के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
लंबे समय से हड़ताल पर थे पटवारी
जानकारी के अनुसार, राजस्व पटवारी संघ महासमुंद के सदस्य 13 अक्टूबर 2026 से हड़ताल पर हैं। इसके चलते जिले में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, फसल गिरदावरी, डीसीएस ऑनलाइन फसल एंट्री और पीवी (फसल भौतिक सत्यापन) जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि इन कार्यों के प्रभावित होने से आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं और राजस्व संबंधी कार्यों के क्रियान्वयन में भी देरी हो रही है।
पांच पटवारियों पर गिरी निलंबन की गाज
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बागबाहरा तहसील के भंगीराम ध्रुव, कमलेश डहरे और नीरज कुमार वर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं, बसना अनुविभाग के तिलक राम चौधरी और सरायपाली अनुविभाग की दमयंती नायक के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
बागबाहरा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से जारी आदेश में पटवारी भंगीराम ध्रुव, हल्का नंबर 09, तहसील कोमाखान को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1) के उल्लंघन के आधार पर निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
जारी आदेश के अनुसार, निलंबित पटवारियों का मुख्यालय संबंधित तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
राजस्व कार्य प्रभावित होने से बढ़ी प्रशासन की चिंता
पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों और आम नागरिकों से जुड़े कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। खासकर फसल सत्यापन, गिरदावरी, नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्यों में देरी से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन की इस कार्रवाई को हड़ताल के बीच सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि निलंबन की इस कार्रवाई के बाद पटवारी संघ अपने आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाता है और जिले में प्रभावित राजस्व कार्य कब तक सामान्य हो पाते हैं।



