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अजीत डोभाल बोले- आजादी का मतलब मनमानी नहीं, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी है

रायपुर। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में अजीत डोभाल ने कहा कि आजादी का मतलब केवल मनमानी करना नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है।” उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस स्वतंत्रता का आनंद ले रही है, वह पूर्वजों के लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। इसलिए युवाओं को इसकी वास्तविक कीमत और महत्व समझना चाहिए।

डोभाल ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि अनुशासन और उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संकीर्ण व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करें। उनका कहना था कि यदि कोई विचार या कदम देशहित के विरुद्ध जाता है तो उसे तुरंत त्याग देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय इतिहास के ऐसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां देश को विकसित राष्ट्र और वैश्विक महाशक्ति बनाने का सुनहरा अवसर मिला है। ऐसे समय में हर नागरिक, विशेषकर युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

अपने संबोधन में डोभाल ने बाल गंगाधर तिलक के प्रसिद्ध नारे स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दौर में हर भारतीय का संकल्प होना चाहिए कि “भारत को सशक्त और विकसित बनाना हमारा जन्मसिद्ध कर्तव्य है।”

समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित करते हुए देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने में उनके ऐतिहासिक योगदान की सराहना की।

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