राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं परोसा भोजन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को गुरुवार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर विशेष सम्मान मिला। बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, मांझी-चालकी, परगना मांझी, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों और जनजातीय प्रतिनिधियों का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आत्मीय स्वागत किया और स्वयं भोजन परोसकर उनका सम्मान किया।
राष्ट्रपति ने कहा- बस्तर शांति और विकास की नई पहचान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल से संवाद करते हुए कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण पूरे देश की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बस्तर पंडुम को जनजातीय संस्कृति का जीवंत उत्सव बताते हुए कहा कि इस आयोजन ने बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव रहा है और वे इसकी अनूठी परंपराओं से हमेशा प्रभावित रही हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मांझी उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत नींव बताया।
राष्ट्रपति ने स्वयं परोसा भोजन, भावुक हुआ प्रतिनिधिमंडल
राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष भोज के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। इस आत्मीयता से पूरा प्रतिनिधिमंडल अभिभूत हो गया।
अमित शाह बोले- पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे कई बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया गौरव का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पूरा अवसर छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की संस्कृति, लोक परंपराएं और जनजातीय विरासत को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान बन चुका है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
राष्ट्रपति को भेंट की गई 300 साल पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की कलाकृति
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, लोकआस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक मानी जाती है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, मांझी-चालकी, पद्मश्री सम्मानित विभूतियां, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन किया।



