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Census 2027: देश में जनगणना की तारीखों का ऐलान, 25 जनवरी से 28 फरवरी तक होगी गणना, जानें कब मिलेगा स्व-गणना का मौका

नई दिल्ली। भारत में जनगणना 2027 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना कराई जाएगी। हालांकि, चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारणी निर्धारित की गई है।

Census 2027: कब होगी जनगणना?

अधिसूचना के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में निर्धारित अवधि के दौरान जनगणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मणिपुर में अगली घोषणा तक जनगणना कार्यक्रम लागू नहीं होगा। वहीं, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में अलग कार्यक्रम के तहत जनगणना कराई जाएगी।

जनगणना से पहले नागरिकों को 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना (Self Enumeration) के माध्यम से अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कराने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक संशोधन राउंड आयोजित किया जाएगा।

2011 के बाद पहली बार होगी देश में जनगणना

भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना को कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। ऐसे में जनगणना 2027 के आंकड़े देश की वर्तमान जनसंख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

जनगणना 2011 में क्या सामने आया था?

जनगणना 2011 भारत की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना थी। इसे दो चरणों में पूरा किया गया था। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास संबंधी जानकारी जुटाने का काम हुआ, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी की गणना की गई।

इस दौरान जनसंख्या, साक्षरता दर, जनसंख्या घनत्व, लिंगानुपात, बाल लिंगानुपात और जनसंख्या वृद्धि दर जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र किए गए थे।

Census 2027 क्यों है महत्वपूर्ण?

जनगणना के जरिए सरकार को देश की आबादी, आवास, शिक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इन आंकड़ों का उपयोग सरकारी योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के वितरण और विकास संबंधी नीतियां तैयार करने में किया जाता है।

करीब 16 साल के अंतराल के बाद होने वाली जनगणना 2027 देश की बदलती जनसंख्या की तस्वीर सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके आंकड़ों से आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं और नीतिगत फैसलों को दिशा मिलने की उम्मीद है।

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