SIR पर कांग्रेस का अमित शाह से सवाल: कितने घुसपैठियों की पहचान हुई, कितनों के नाम वोटर लिस्ट से कटे?

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया है कि SIR प्रक्रिया के बाद कितने कथित घुसपैठियों की पहचान की गई, कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और कितनों को देश से बाहर भेजा गया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि SIR का बचाव करते हुए घुसपैठियों का मुद्दा उठाया जा रहा है, लेकिन सरकार को इस प्रक्रिया के नतीजों के आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा कि करीब 100 करोड़ भारतीयों को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है और उन्हें इसके परिणाम जानने का अधिकार है।
जयराम रमेश ने पूछे तीन सवाल
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तीन सवालों के जवाब मांगे हैं:
- SIR के बाद कितने कथित घुसपैठियों की पहचान की गई?
- कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए?
- कितने लोगों को देश से बाहर भेजा गया?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर सरकार से जवाब मांगा। ये कांग्रेस के आरोप और सवाल हैं; इन पर सरकार की ओर से आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर जवाब महत्वपूर्ण होगा।
अमित शाह ने राहुल गांधी पर लगाए थे आरोप
यह विवाद उस समय बढ़ा, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने SIR का विरोध कर रहे राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। शाह ने आरोप लगाया था कि विपक्ष घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका का बचाव करते हुए कहा था कि मतदाता सूची को शुद्ध और सही रखना आयोग की जिम्मेदारी है।
वोटर लिस्ट और मतदान अधिकार बना राजनीतिक मुद्दा
SIR को लेकर कांग्रेस लगातार मतदाता सूची की पारदर्शिता और नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। वहीं, भाजपा की ओर से इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कवायद बताया जा रहा है।
अब कांग्रेस ने गृह मंत्री से कथित घुसपैठियों की पहचान, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और निर्वासन से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह देखना अहम होगा कि संबंधित एजेंसियां इन सवालों के जवाब में क्या आधिकारिक जानकारी सामने रखती हैं।



