डेंगू से डायरिया तक… मानसून में क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा? जानिए पूरी सच्चाई

रायपुर। मानसून अपने साथ हरियाली, ठंडक और खुशहाली लेकर आता है, लेकिन यदि इस मौसम में सावधानी न बरती जाए तो यही बारिश कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है। लेखक, विचारक, दार्शनिक एवं पुलिस अधिकारी एच.पी. जोशी ने अपने विस्तृत लेख में बताया है कि बारिश स्वयं बीमारी नहीं फैलाती, बल्कि बारिश के बाद बनने वाली परिस्थितियां संक्रामक रोगों के प्रसार को बढ़ावा देती हैं।
उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान जलभराव, बढ़ी हुई नमी, दूषित पेयजल और मच्छरों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, डायरिया, हैजा, वायरल हेपेटाइटिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भी हर वर्ष मानसून में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
मच्छरों का बढ़ता खतरा
लेख में बताया गया है कि केवल पांच से सात दिन तक रुका हुआ पानी मच्छरों के हजारों लार्वा विकसित करने के लिए पर्याप्त होता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर विभिन्न जल स्रोतों में विकसित हो सकता है। कूलर, पानी की टंकियां, गमलों की तश्तरियां, पुराने टायर और छत पर जमा पानी मच्छरों के प्रमुख प्रजनन स्थल बन जाते हैं।
इन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा
लेखक के अनुसार मानसून में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है। कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता के कारण इनमें बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
मानसून में इन बीमारियों से रहें सतर्क
- डेंगू
- मलेरिया
- चिकनगुनिया
- टाइफाइड
- डायरिया और हैजा
- लेप्टोस्पायरोसिस
- वायरल हेपेटाइटिस (पीलिया)
स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये उपाय
- केवल ताजा और गर्म भोजन का सेवन करें।
- उबला या स्वच्छ पेयजल ही पिएं।
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर, टंकियों और गमलों की नियमित सफाई करें।
- मच्छरदानी और मच्छररोधी क्रीम का उपयोग करें।
- फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
- साबुन से नियमित हाथ धोएं।
- बुखार, उल्टी, दस्त या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इन गलतियों से बचें
- खुले और सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थ न खाएं।
- बासी भोजन का सेवन न करें।
- तेज बुखार होने पर स्वयं एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवा न लें।
- डेंगू की आशंका होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन न करें।
- घर के आसपास गंदगी और जलभराव न होने दें।
मिथक और सच्चाई
एच.पी. जोशी ने लेख में मानसून से जुड़े कई मिथकों का भी खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश में भीगने से सीधे बुखार नहीं होता, बल्कि संक्रमण इसके लिए जिम्मेदार होता है। इसी तरह डेंगू का मच्छर केवल गंदे पानी में नहीं बल्कि साफ और रुके हुए पानी में भी पनपता है तथा हर बुखार में एंटीबायोटिक लेना जरूरी नहीं होता।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
लेख के अंत में लेखक ने कहा है कि “बारिश प्रकृति का आशीर्वाद है, इसे अभिशाप केवल इंसानों की लापरवाही बनाती है। यदि हम स्वच्छता अपनाएं, मच्छरों को पनपने से रोकें, सुरक्षित भोजन और स्वच्छ पानी का उपयोग करें तथा बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर समय रहते उपचार लें, तो मानसून का आनंद सुरक्षित रूप से लिया जा सकता है।”
उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि मानसून के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, संतुलित आहार और मच्छर नियंत्रण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि स्वयं के साथ-साथ पूरे समाज को भी मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।



