बैंक सखी बनीं ललिता बघेल, गांव-गांव पहुंचा रहीं बैंकिंग सुविधाएं

रायपुर, 27 अगस्त 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में बैंक सखियां अहम भूमिका निभा रही हैं। बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के डोंगरीगुड़ा निवासी ललिता बघेल ऐसी ही प्रेरणादायी बैंक सखी हैं, जो ग्रामीणों को बैंकिंग और सरकारी सेवाएं उनके घर-द्वार तक उपलब्ध करा रही हैं।
वर्ष 2019 से बैंक सखी के रूप में कार्यरत ललिता बघेल डोंगरीगुड़ा, कलेपाल और बुरंगपाल ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि का भुगतान उपलब्ध करा रही हैं। उनकी सहज उपलब्धता से ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर जाने में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिली है।
चार करोड़ से अधिक का भुगतान
ललिता बघेल ग्रामीणों को पेंशन, महतारी वंदन योजना की सहायता राशि, छात्रवृत्ति सहित मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय भुगतान की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। वर्ष 2019 से अब तक वह चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान कर चुकी हैं।
दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं के इस स्थानीय माध्यम से बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद हितग्राहियों को विशेष लाभ मिल रहा है। अब उन्हें राशि प्राप्त करने के लिए दूर स्थित बैंक शाखाओं तक आने-जाने की परेशानी कम हुई है।
बैंकिंग के साथ लोक सेवा केंद्र की सेवाएं
ललिता की सेवाएं केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं हैं। वह लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, पैन कार्ड, श्रम कार्ड, बैंक खाता खोलने, किसान सम्मान निधि के पंजीयन और एग्रीस्टैक पंजीयन जैसी डिजिटल एवं शासकीय सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।
इन सेवाओं के गांव में ही उपलब्ध होने से ग्रामीणों और किसानों को सरकारी कार्यालयों तथा बैंकों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है। साथ ही, डिजिटल सेवाओं के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों के बीच बनीं ‘बैंक दीदी’
स्नातक तक शिक्षित ललिता बघेल ने अपने सेवाभाव और निरंतर प्रयासों से तीन ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों तक बैंकिंग एवं लोक सेवा केंद्र की सुविधाएं पहुंचाई हैं। उनकी सहज उपलब्धता और सहयोगी व्यवहार के कारण ग्रामीण उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बैंक दीदी’ के नाम से जानते हैं।
ललिता का कहना है कि ग्रामीणों की मदद करने से उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है। ग्रामीणों से मिलने वाला स्नेह और विश्वास उन्हें अपने काम को और बेहतर ढंग से करने के लिए प्रेरित करता है।
स्वरोजगार से परिवार को भी आर्थिक सहयोग
बैंक सखी के रूप में सेवाएं देने के साथ ललिता अपने परिवार को भी आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही हैं। वह अपने पिता सोमारू बघेल की खेती-किसानी में भी आर्थिक सहयोग करती हैं।
ललिता की कहानी बताती है कि डिजिटल और वित्तीय सेवाओं के विस्तार ने ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा किए हैं। वह स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी आर्थिक एवं डिजिटल रूप से सक्षम बनाने में योगदान दे रही हैं।



