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ब्लैक करेंसी स्कैम का पर्दाफाश, 4 करोड़ से ज्यादा कैश के साथ 7 ठग गिरफ्तार

रायपुर, 22 अगस्त 2026 राजधानी रायपुर में 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की जांच के दौरान पुलिस ने देशभर में सक्रिय एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित खंडाला के एक रिसॉर्ट में दबिश देकर गिरोह के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट्स और ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री व दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय है और देश के अलग-अलग राज्यों में 100 से अधिक लोगों को निशाना बनाकर बड़ी रकम की ठगी कर चुका है। आरोपी लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने और काले नोटों को विशेष केमिकल के जरिए असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झांसा देते थे।

1.13 करोड़ की ठगी से मिला गिरोह का सुराग

मामला थाना तेलीबांधा के अपराध क्रमांक 330/2026 से जुड़ा है। इस मामले में पुलिस ने पहले नागपुर से दो महिला आरोपियों कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड समेत करीब 70 हजार रुपये की सामग्री बरामद हुई थी।

पूछताछ के साथ आरोपियों के मोबाइल फोन में मौजूद चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के तकनीकी विश्लेषण से पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में अहम जानकारी मिली। इसके बाद आरोपियों की लोकेशन पुणे में ट्रेस की गई।

खंडाला के रिसॉर्ट में रकम दोगुनी करने का झांसा

पुलिस टीम ने पुणे पहुंचकर करीब एक सप्ताह तक संदिग्धों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों पर नजर रखी। इसी दौरान खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में गिरोह के सदस्यों के मौजूद होने की जानकारी मिली।

पुलिस ने रिसॉर्ट में दबिश दी तो वहां 7 आरोपी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर ठगी करते मिले। पुलिस के अनुसार वाराणसी निवासी पीड़ित करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था और लालच में आरोपियों को रकम सौंप चुका था। इसी दौरान पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। सभी सात आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया।

4 करोड़ से ज्यादा नकदी और 17 मोबाइल बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट्स और ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री जब्त की है। बरामद दस्तावेजों और सामान की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे गिरोह के नेटवर्क और अन्य ठगी के मामलों का खुलासा हो सकता है।

ब्लैक करेंसी स्कैम’ के नाम पर ऐसे करते थे ठगी

जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को प्रभावशाली लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताते थे। इसके बाद पीड़ितों को बड़े निवेश, फंड स्वीकृति, विदेशी परीक्षण, सुरक्षा अनुमति और विशेष केमिकल जैसी बातों में उलझाया जाता था।

आरोपी पीड़ितों को बड़े होटल या अन्य आलीशान स्थानों पर बुलाकर नकली केमिकल प्रक्रिया का प्रदर्शन करते थे। दावा किया जाता था कि विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक की मदद से काले रंग से ढके नोटों को असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।

पीड़ित का भरोसा जीतने के बाद उससे अलग-अलग किश्तों में बड़ी रकम वसूली जाती थी। कभी विदेशी केमिकल खरीदने, कभी हाई-पावर केमिकल, विदेशी परीक्षण, वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति और फंड रिलीज के नाम पर लगातार पैसे लिए जाते थे। पुलिस ने इस तरीके को ‘Wash & Wash/Black Currency Scam’ बताया है।

डी ग्रुप कंपनी’ से जुड़े होने का करते थे दावा

पुलिस के अनुसार आरोपी प्रभाव जमाने के लिए खुद को ‘डी ग्रुप कंपनी (दाऊद ग्रुप)’ से जुड़ा बताते थे। गिरोह में सदस्यों को उनकी भूमिका के अनुसार ‘कैप्टन’ और ‘बड़े सर’ जैसे नामों से बुलाया जाता था।

पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी बड़े नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाते थे। गिरोह के मुख्य सदस्यों के साथ निजी गनमैन भी रहते थे। पीड़ितों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर सहित अलग-अलग शहरों के बड़े होटलों में बुलाया जाता था।

गिरोह के तीन प्रमुख सदस्य

पुलिस के मुताबिक ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर गिरोह के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं।

प्रवीण कुमार गिरोह में ‘कैप्टन’ की भूमिका निभाता था, जबकि मनोज कुमार को ‘बड़े सर’ के नाम से संबोधित किया जाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय थीं और ठगी से मिली रकम का प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और मनोज कुमार श्रीवास्तव पहले भी ठगी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

इस मामले में पुलिस अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें नागपुर से गिरफ्तार की गई दो महिला आरोपियों के अलावा पुणे से पकड़े गए 7 आरोपी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में की गई ठगी की घटनाओं, गिरोह के नेटवर्क, पीड़ितों और ठगी की कुल रकम के बारे में जानकारी जुटा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

  • ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, उम्र 46 वर्ष, निवासी गुड़गांव, हरियाणा, हाल मुकाम नालासोपारा, मुंबई।
  • प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, उम्र 52 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  • मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, उम्र 55 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  • विवेक सिंह, उम्र 48 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  • शुभम पांडेय, उम्र 37 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश, हाल मुकाम मुंबई।
  • योगेन्द्र चौहान, उम्र 48 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
  • बालमुकुंद दीक्षित, उम्र 40 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश।

रायपुर पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, देशभर में की गई ठगी और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।

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