Chhattisgarh: पाठ्य पुस्तक निगम में 192 करोड़ की गड़बड़ी का मामला गरमाया, पांच साल बाद भी नहीं मिला जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) में 192 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। राज्य संपरीक्षा (ऑडिट) रिपोर्ट में सामने आई इस अनियमितता पर पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों से संतोषजनक जवाब नहीं लिया जा सका है। इससे सरकारी वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, राज्य संपरीक्षा रिपोर्ट में निगम के वित्तीय लेन-देन और कार्यप्रणाली में करीब 192 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कई मामलों में नियमों की अनदेखी, वित्तीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन और दस्तावेजी खामियों की ओर भी संकेत किया गया।
रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद कई आपत्तियों का निराकरण नहीं हो पाया है। न तो सभी मामलों में स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किए गए और न ही जिम्मेदारी तय होने की स्थिति सामने आई है।
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों का समय पर निराकरण होना आवश्यक है, ताकि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। लंबे समय तक कार्रवाई लंबित रहने से सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।
अब इस मामले को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो सकता है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा सत्र में यह मुद्दा जोर-शोर से उठ सकता है और सरकार से कार्रवाई की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा।
मुख्य बिंदु
- छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) में 192 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी।
- राज्य संपरीक्षा रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख।
- पांच साल बाद भी कई ऑडिट आपत्तियों का नहीं हुआ निराकरण।
- जवाबदेही और कार्रवाई को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल।
- मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर फिर गरमाने के आसार।



