छत्तीसगढ़राजनीतिक

मुख्यमंत्री साय का बड़ा ऐलान: सिंचाई विस्तार और फसल विविधिकरण से बढ़ेगी किसानों की आय

रायपुर, 4 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन की आधारशिला है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक कृषि तकनीक, कृषि यंत्रीकरण और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर लगातार काम कर रही है।

राजधानी रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण उन्होंने खेती की चुनौतियों को करीब से देखा है और सरकार किसानों से किए गए वादों को प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी कर रही है। साथ ही पूर्व के दो वर्षों का लंबित बोनस भी किसानों को दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले खरीफ विपणन सीजन में करीब 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली।

उन्होंने किसानों से केवल धान पर निर्भर न रहने की अपील करते हुए कहा कि दलहन, तिलहन, मक्का और कोदो-कुटकी जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए नई सिंचाई परियोजनाएं, बैराज, एनीकट और नहर विस्तार के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। किसानों को सोलर सिंचाई पंप, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों का लाभ भी दिया जा रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि बस्तर की इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से बैराज बनाए जाएंगे। वहीं सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए करीब 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्निर्माण और सुधार कार्यों के लिए भी करीब 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद कमजोर होने के बाद बस्तर में विकास का नया दौर शुरू हुआ है। नियद नेल्लानार योजना और सेवाडेरा मॉडल के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से खेती की तस्वीर बदल रही है। प्रदेश की महिलाएं ‘ड्रोन दीदी’ बनकर नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं और शिक्षित युवा भी आधुनिक खेती एवं कृषि आधारित स्टार्टअप की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने नई उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक राज्य में करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी एमओयू हो चुके हैं। सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, नई दुनिया के संपादक सतीश चंद्र श्रीवास्तव सहित कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button