छत्तीसगढ़ताज़ा खबरेंदेश-दुनियाप्रशासनिकवायरल खबरें

विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़: CM साय

रायपुर, 31 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ अब शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित हर क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री रविवार को राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के तहत 10 प्रमुख मिशन तय किए गए हैं, जिन पर लगातार काम किया जा रहा है।

सुरक्षा और विकास की रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वित रणनीति के साथ काम शुरू किया।

पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को निर्णायक गति मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी। लंबे समय तक नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते रहे, जिसके कारण कई दूरस्थ इलाके विकास की मुख्यधारा से कटे रहे।

नियद नेल्लानार’ से दूरस्थ गांवों तक पहुंचा विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं है। स्थायी शांति के लिए बस्तर के हर गांव और हर परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना जरूरी है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ ‘आपका अच्छा गांव’ है।

इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी शुरू किया है। उन्होंने कहा कि बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार समग्र विकास की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है, जबकि लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है।

वहीं, ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

शांति के साथ पर्यटन और आजीविका के नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति लौटने के साथ रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के जरिए स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां पर्यटक होम-स्टे के माध्यम से स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को करीब से अनुभव कर रहे हैं।

सरकार होम-स्टे को बढ़ावा देने के लिए ऋण और अनुदान की सुविधा भी दे रही है। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को शामिल कर इसे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

आत्मसमर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास के द्वार खुले

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति बनाई गई।

सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़ने वालों के साथ न्याय किया जाएगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा का रास्ता चुना है।

युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं।

प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम और ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान भी संचालित हो रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को नई गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में निवेश, उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक प्रदेश को करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी जीवन यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं।

उन्होंने बताया कि गांव के लोगों के आग्रह पर उन्होंने पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। इसके बाद गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। वर्ष 1990 में वे तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ को मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है, ताकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button