ई-रिक्शा ने बदली महिलाओं की जिंदगी, हर महीने 10 से 12 हजार रुपए की कमाई

रायपुर, 25 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बालोद जिले के ग्राम झलमला की सेवती ठाकुर और ग्राम सिवनी की अंजू नेताम ने योजना का लाभ लेकर स्वरोजगार शुरू किया है। इससे उनकी आमदनी बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
ग्राम झलमला निवासी सेवती ठाकुर श्रम विभाग में पंजीकृत हैं और स्व-सहायता समूह से जुड़कर कैंटीन का संचालन करती हैं। कैंटीन के लिए कच्चा माल और खाद्य सामग्री लाने में उन्हें पहले परिवहन के लिए किराया देना पड़ता था। योजना के तहत आर्थिक अनुदान और बैंक ऋण की सहायता से ई-रिक्शा मिलने के बाद अब वे स्वयं परिवहन का काम संभाल रही हैं। इससे किराये की बचत होने के साथ समूह के मुनाफे में भी बढ़ोतरी हुई है।

सेवती ठाकुर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सरकार की यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपना ‘विष्णु भैया’ बताते हुए कहा कि उनके सहयोग से महिलाओं का आत्मविश्वास और सम्मान बढ़ा है।
वहीं ग्राम सिवनी की अंजू नेताम पहले गृहिणी थीं। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत ई-रिक्शा मिलने के बाद उन्होंने इसे स्वरोजगार का माध्यम बनाया। अब वे स्कूली बच्चों को घर से स्कूल पहुंचाने और वापस लाने के साथ स्थानीय परिवहन सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं। इस काम से उन्हें हर महीने करीब 10 से 12 हजार रुपए का शुद्ध लाभ हो रहा है।
अंजू नेताम ने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना का भी नियमित लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं से उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला है।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना जैसी पहल से महिलाएं रोजगार के नए अवसरों से जुड़ रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सेवती और अंजू की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल बन रही है।



