
रायपुर, 2 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के 14 दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को इस मानसून बड़ी राहत मिली है। वर्षों से बारिश के मौसम में उफनती नदियों और नालों के कारण दुनिया से कट जाने वाले इन गांवों को जोड़ने के लिए 44वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने कई स्थानों पर अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज (पैदल पुल) तैयार किए हैं। इन पुलों से अब ग्रामीण सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकेंगे।

36 वर्षों से विकास की राह में बाधा
अबूझमाड़ क्षेत्र वर्ष 1990 के दशक से नक्सली प्रभाव के कारण सड़क और स्थायी पुल-पुलियों जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है। हर साल बारिश के दौरान नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने पर 14 गांवों का ओरछा मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। ऐसे में ग्रामीणों को इलाज, राशन, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी।
सुरक्षा के साथ मानवीय पहल
44वीं वाहिनी ITBP द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने के बाद जवानों ने केवल सुरक्षा व्यवस्था तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान भी किया। स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए जवानों ने रणनीतिक स्थानों पर मजबूत लकड़ी के अस्थायी फुट ब्रिज तैयार किए, जिससे अब बारिश के मौसम में भी पैदल और दोपहिया वाहनों का आवागमन संभव हो गया है।
स्थायी पुल बनने तक बने रहेंगे लाइफलाइन
44वीं वाहिनी ITBP के सेनानी सिद्धिक पी. पी. ने बताया कि बल की प्राथमिकता केवल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों का जीवन भी आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि स्थायी सड़क और पुलों का निर्माण पूरा होने तक ये अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज ग्रामीणों के लिए लाइफलाइन साबित होंगे।
ग्रामीणों ने जताया आभार
बरसात के दिनों में सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचना, राशन लाना और जरूरी कामों के लिए ओरछा जाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। ग्रामीणों ने ITBP के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए जवानों का आभार व्यक्त किया है।




