चिरायु योजना की बड़ी सफलता: मासूम मयंक का कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफल

रायपुर, 14 अगस्त 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और मुख्यमंत्री चिरायु योजना ने राजनांदगांव जिले के एक मासूम बच्चे मयंक के जीवन में फिर से सुनने की खुशियां लौटा दी हैं। करीब डेढ़ वर्ष की उम्र में सुनने की क्षमता खो चुके मयंक के परिवार के लिए यह बेहद कठिन दौर था। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और शासकीय योजनाओं के प्रभावी समन्वय से मयंक को समय पर उपचार मिला और अब वह आवाजों की दुनिया में लौटने की राह पर है।

आरबीएसके टीम ने मयंक की स्थिति की जांच के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और परिवार से समन्वय करते हुए उसे देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था एम्स में उपचार के लिए रेफर किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मयंक का कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
ऑपरेशन के बाद वह भावुक क्षण आया, जिसका इंतजार मयंक के माता-पिता लंबे समय से कर रहे थे। जब पहली बार कोक्लियर इम्प्लांट मशीन को सक्रिय किया गया, तो मयंक ने अपने माता-पिता की आवाज सुनी। बच्चे के चेहरे पर सुनने की प्रतिक्रिया देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। यह पल मुख्यमंत्री चिरायु योजना की सफलता और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता की जीवंत मिसाल बन गया।
ऑपरेशन के बाद भी जारी है निगरानी और पुनर्वास
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑपरेशन के बाद मयंक के स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसे आगे के उपचार और पुनर्वास के लिए सीआरसी (क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र) भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में उसे स्पीच एवं हियरिंग थेरेपी दी जा रही है, ताकि वह आवाजों को बेहतर तरीके से समझ सके और धीरे-धीरे बोलना सीख सके।
मयंक की कहानी यह बताती है कि बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, उचित मार्गदर्शन और शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और मुख्यमंत्री चिरायु योजना के माध्यम से मिला उपचार मयंक के लिए सिर्फ चिकित्सा सुविधा नहीं, बल्कि उसकी खामोश दुनिया में जिंदगी के सुरों की नई शुरुआत है।



