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दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा: जंतर-मंतर आंदोलन के आसपास 5 दिन में दिखे 400 अपराधी

दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है। पुलिस के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है। शुरुआती जांच में यह संख्या करीब 400 बताई गई थी, लेकिन बाद के विश्लेषण में संदिग्धों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है।

20 जुलाई की हिंसा से जोड़कर हो रही जांच

दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों का 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़, पुलिसकर्मियों पर हमले और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की घटनाओं से कोई संबंध था या नहीं। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और खुफिया इनपुट का विश्लेषण किया जा रहा है।

चार FRS कैमरों से रखी गई निगरानी

पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के मुख्य प्रवेश और निकास बिंदुओं पर चार हाई-रिजॉल्यूशन FRS यूनिट तैनात की गई थीं। ये कैमरे सीधे दिल्ली पुलिस के क्रिमिनल डेटाबेस से जुड़े हैं। किसी व्यक्ति का चेहरा कैमरे में कैद होते ही सिस्टम उसका मिलान डेटाबेस से करता है और यदि वह वांछित, भगोड़ा या आपराधिक रिकॉर्ड वाला है तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।

15 FIR दर्ज, जांच जारी

दिल्ली पुलिस ने बताया कि संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मामलों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियां सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

NEET पेपर लीक को लेकर जारी है प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर CJP का यह विरोध-प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

FRS क्या है?

फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) एक ऐसी तकनीक है, जो कैमरे में कैद किसी व्यक्ति के चेहरे का मिलान पुलिस के डेटाबेस से करती है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो सिस्टम तत्काल पुलिस को अलर्ट जारी कर देता है। दिल्ली पुलिस पहले भी गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, ईद, दीपावली, होली और अन्य बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए इस तकनीक का उपयोग कर चुकी है।

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