आयुष्मान योजना से बिहार की महिला का रायपुर में सफल इलाज, तीन नसों का हुआ बाईपास

रायपुर, 1 सितंबर 2026। राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की जटिल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) सफलतापूर्वक की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। चिकित्सकीय भाषा में इसे ट्रिपल वेसल डिजीज (TVD) कहा जाता है। मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता भी करीब 40 प्रतिशत थी।
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की। बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, आर्टेरियल ग्राफ्ट सामान्यतः लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है।
सीने की हड्डी खोलकर की गई सर्जरी
मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई। इसमें सीने के बीच की हड्डी (स्टर्नम) को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित और विश्वसनीय ऑपरेटिव तकनीक है।
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही मरीज को होश आ गया और शाम को उन्होंने हल्का नाश्ता किया। ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही मरीज ने चलना-फिरना शुरू कर दिया। उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर और स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है।
मधुबनी से दरभंगा और फिर रायपुर पहुंची मरीज
मरीज के अनुसार, करीब डेढ़ महीने पहले पहली बार उन्हें सीने में दर्द हुआ था। उन्होंने मधुबनी के एक अस्पताल में जांच कराई, लेकिन हृदय विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गैस और एसिडिटी की दवाएं देकर घर भेज दिया गया।
कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल ले गए। वहां एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख नसों में ब्लॉकेज की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने उन्हें बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी।
परिजन पहले पटना में ऑपरेशन कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रायपुर में रहने वाले रिश्तेदार से अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग की जानकारी मिली। इसके बाद मरीज के परिजन एंजियोग्राफी की सीडी लेकर रायपुर पहुंचे और डॉ. कृष्णकांत साहू से परामर्श लिया।
बिहार के आयुष्मान कार्ड से छत्तीसगढ़ में मिला उपचार
डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की बाईपास सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल में संभव थी, लेकिन मरीज बिहार की निवासी होने के कारण यह स्पष्ट करना जरूरी था कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ में योजना का लाभ मिल सकेगा या नहीं।
आयुष्मान योजना कार्यालय से जानकारी लेने के बाद इसकी पुष्टि हुई कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी मरीज का उपचार अम्बेडकर अस्पताल में किया जा सकता है। इसके बाद मरीज को भर्ती कर आवश्यक उपचार शुरू किया गया।
500 mg/dL से अधिक था ब्लड शुगर
मरीज के उपचार के दौरान सबसे बड़ी चुनौती उनका अत्यधिक अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती होने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था।
चिकित्सकीय टीम ने पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और मरीज की स्थिति को सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाने के बाद ही बाईपास ऑपरेशन किया।
कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा
डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि सामान्य तौर पर महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम पुरुषों की तुलना में कम माना जाता है और यह बीमारी महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक उम्र में सामने आती है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, पारिवारिक इतिहास, बढ़ता वजन, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या अन्य संभावित हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय जांच कराएं।
पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी बढ़ रहा भरोसा
अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी और विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभाग में आधुनिक तकनीकों के जरिए जटिल हृदय रोगों की सर्जरी की जा रही है।
पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह शासकीय चिकित्सा संस्थान के लिए गौरव की बात है कि छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार सहित आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय एवं ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अम्बेडकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के प्रति मरीजों और उनके परिजनों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।



