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41वें चक्रधर समारोह में 8 साल की आशिका ने मचाया धमाल, कथक प्रस्तुति से जीता दर्शकों का दिल

रायपुर। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह में महज 8 वर्ष की नन्हीं कथक कलाकार आशिका सिंघल ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आशिका ने कथक की पारंपरिक शैली के साथ भाव-भंगिमाओं और लय-ताल का ऐसा सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया कि पूरा मंच तालियों से गूंज उठा।

आशिका ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘जय-जय जगतजननी देवी…’ स्तुति से की। इसके बाद उन्होंने कथक के तोड़ा, 50 चक्कर, टुकड़ा, आमद और तत्कार की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कम उम्र में उनकी मंचीय परिपक्वता और कथक की बारीकियों पर पकड़ ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

राधा-कृष्ण की होली-रास ने बांधा समां

कार्यक्रम के अगले चरण में आशिका ने श्रीकृष्ण और राधा-रानी की होली-रास पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भाव-भंगिमाओं के जरिए राधा-कृष्ण की लीलाओं को जीवंत करते हुए उन्होंने लय और ताल का प्रभावी समन्वय दिखाया। उनकी प्रस्तुति के दौरान दर्शक भाव-विभोर नजर आए और प्रस्तुति पूरी होने पर तालियों से कलाकार का उत्साह बढ़ाया।

4 साल की उम्र से कर रहीं कथक की साधना

रायपुर के राजकुमार कॉलेज में कक्षा तीसरी की छात्रा आशिका सिंघल ने महज 4 वर्ष की उम्र से कथक का प्रशिक्षण शुरू किया है। वह अपनी गुरु नेहा सिंह के मार्गदर्शन में कथक की नियमित साधना कर रही हैं।

आशिका इससे पहले पावस प्रसंग, राज्योत्सव और 40वें चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने एक बार फिर यह दिखाया कि कम उम्र में भी निरंतर अभ्यास और गुरु के मार्गदर्शन से कला के क्षेत्र में प्रभावशाली पहचान बनाई जा सकती है।

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