21 साल बाद बदली पीड़िया गांव की तस्वीर, पहली बार हुआ आधार पंजीयन

बीजापुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का सुदूर और कभी नक्सल प्रभावित रहा पीड़िया गांव अब विकास की नई कहानी लिख रहा है। गंगालूर तहसील के इस गांव में वर्षों तक नक्सली गतिविधियों के कारण जहां शिक्षा और सरकारी सेवाएं ठप थीं, वहीं अब हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। 21 वर्षों से बंद पड़ा स्कूल दोबारा शुरू हो गया है और पहली बार गांव में विशेष आधार नामांकन एवं अद्यतन शिविर का सफल आयोजन किया गया।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद प्रशासन की पहुंच अब गांव तक आसान हो गई है। इसी के तहत ग्रामीणों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से पहली बार आधार शिविर लगाया गया। नेटवर्क जैसी तकनीकी चुनौतियों के बावजूद शिविर में 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन और अद्यतन सफलतापूर्वक किया गया। आधार कार्ड बनने से अब ग्रामीणों को राशन, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
21 साल बाद फिर गूंजी स्कूल की घंटी
पीड़िया गांव की सबसे बड़ी उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में देखने को मिली है। नक्सली हिंसा के चलते 21 वर्षों से बंद पड़ा प्राथमिक विद्यालय अब फिर से संचालित हो रहा है। वर्तमान में 84 बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर पढ़ाई कर रहे हैं। लंबे समय बाद स्कूल की घंटी गूंजने से गांव में खुशी का माहौल है और अभिभावकों को अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की नई उम्मीद मिली है।

डर से विकास की ओर बढ़ा गांव
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक समय ऐसा था जब नक्सली गतिविधियों के कारण गांव में सामान्य जीवन भी मुश्किल हो गया था। सरकारी अधिकारी और योजनाएं गांव तक नहीं पहुंच पाती थीं। लेकिन अब शांति का वातावरण है और गांव तेजी से विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहा है।
प्रशासन का कहना है कि पीड़िया में आयोजित आधार शिविर केवल दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शासन की सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों का विश्वास जीतने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा, पहचान और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से अब यह गांव नक्सलवाद की पहचान छोड़ विकास की नई मिसाल बनता जा रहा है।




