
रायपुर। नीट पेपर लीक मामले में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रदर्शन के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। रायपुर के खम्हारडीह थाना के बाहर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पिछले 15 घंटे से अधिक समय से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। कांग्रेस की मांग है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए और भाजपा नेताओं पर भी काउंटर एफआईआर दर्ज की जाए।

कांग्रेस का यह धरना भाजपा-कांग्रेस टकराव के बाद 16 कांग्रेस नेताओं और कई कार्यकर्ताओं पर गैर-जमानती धाराओं में दर्ज एफआईआर के विरोध में किया जा रहा है। थाने के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे हैं और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनआवाज की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। बैज ने स्पष्ट किया कि जब तक एफआईआर वापस नहीं ली जाती, तब तक धरना जारी रहेगा।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
दीपक बैज ने भाजपा पर कांग्रेस कार्यालय पर सुनियोजित हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता लाठी, डंडे और पत्थर लेकर कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पथराव किया। उनका आरोप है कि घटना के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
सुशील आनंद शुक्ला का आरोप
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ट्रैक्टर भरकर पत्थर, लाठियां और पुराने चप्पल लेकर आए थे तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया। उनका दावा है कि पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पांच आंसू गैस के गोले दागे और वॉटर कैनन का इस्तेमाल भी उन्हीं पर किया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना में कांग्रेस के एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता, जिनमें महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, घायल हुए हैं।
प्रदेश में बढ़ा सियासी तनाव
खम्हारडीह थाने के बाहर जारी धरने के चलते रायपुर में राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जबकि पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।




