छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में बड़ा सुधार: अब रजिस्ट्री के साथ होगा ऑटो नामांतरण, डिजिटल होगी पूरी राजस्व व्यवस्था

रायपुर, 03 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने आम नागरिकों को राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में राहत देने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए महत्वपूर्ण संशोधनों के तहत अब भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और राजस्व न्यायालयों की कई प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल होंगी। इन बदलावों का उद्देश्य लोगों को अनावश्यक कार्यालयों और अदालतों के चक्कर से राहत दिलाना, समय की बचत करना और सुशासन को मजबूत करना है।
डिजिटल होगी पूरी राजस्व प्रक्रिया
नए संशोधनों के तहत अब भूमि संबंधी रिकॉर्ड, नोटिस और राजस्व अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से भेजने और सुरक्षित रखने को कानूनी मान्यता मिल गई है। धारा 33 के तहत डिजिटल नोटिस और सूचना वैध होगी, जबकि धारा 30 में संशोधन कर राजस्व न्यायालयों में फाइलों और दस्तावेजों के डिजिटल प्रेषण की व्यवस्था लागू की गई है।
इससे राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
जियो-रेफरेंस्ड नक्शों से सुलझेंगे सीमांकन विवाद
भूमि सीमांकन से जुड़े विवादों को कम करने के लिए धारा 107 के तहत जियो-रेफरेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा तथा विवादों के समाधान में आसानी होगी।
फर्जीवाड़े और अवैध बंटवारे पर लगेगी रोक
सरकार ने कृषि भूमि के अनावश्यक विखंडन और भू-अर्जन के दौरान होने वाली गड़बड़ियों पर भी सख्ती दिखाई है।
- 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक।
- भू-अर्जन की अधिसूचना जारी होते ही संबंधित भूमि के अंतरण, डायवर्जन और खाता विभाजन पर तत्काल रोक।
- फर्जी लेनदेन और अवैध लाभ की संभावनाओं पर नियंत्रण।
रजिस्ट्री के साथ ही होगा ऑटो ई-नामांतरण
राजस्व सुधारों का सबसे बड़ा लाभ अब जमीन मालिकों को मिलेगा। धारा 110 में किए गए संशोधन के तहत Auto e-Mutation की व्यवस्था लागू की गई है।
अब:
- रजिस्ट्री के साथ ही स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
- अलग से नामांतरण के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
- पंजीयन विभाग को वैधानिक रूप से नामांतरण का अधिकार मिलेगा।
इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले नामांतरण मामलों में तेजी आएगी।
वारिसों को मिलेगी बड़ी राहत
नए प्रावधानों के अनुसार अब भूमि स्वामी अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा, सूचीबद्ध वैध उत्तराधिकारियों के पक्ष में स्वतः ई-नामांतरण का प्रावधान भी किया गया है।
इससे भविष्य में पारिवारिक विवादों और कोर्ट-कचहरी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
सुशासन और डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार भू-राजस्व संहिता में किए गए ये संशोधन केवल कानूनी बदलाव नहीं हैं, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शी प्रशासन और नागरिक सुविधा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन सुधारों से आम नागरिकों का समय, धन और प्रशासनिक परेशानियां कम होंगी, वहीं राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और आधुनिक बनेगी।
मुख्य बातें (Highlights)
- ✔️ रजिस्ट्री के साथ स्वतः ऑटो ई-नामांतरण।
- ✔️ डिजिटल नोटिस और ऑनलाइन राजस्व प्रक्रिया को कानूनी मान्यता।
- ✔️ जियो-रेफरेंस्ड नक्शों से सटीक सीमांकन।
- ✔️ 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक।
- ✔️ भू-अर्जन के दौरान फर्जीवाड़े पर सख्ती।
- ✔️ जीवनकाल में ही वारिसों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की सुविधा।
- ✔️ पारदर्शी, तेज और जनहितैषी राजस्व व्यवस्था की दिशा में बड़ा सुधार।



